अगरतला , जुलाई 04 -- त्रिपुरा पुलिस ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के एक वरिष्ठ अधिकारी और तीन अन्य लोगों के खिलाफ 14.55 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय घोटाले का मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

अगरतला के न्यू कैपिटल कॉम्प्लेक्स (एनसीसी) थाना ने नागपुर के व्यवसायी मनीष मलानी की शिकायत पर यह आपराधिक मामला दर्ज किया। श्री मलानी ने त्रिपुरा कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिषेक चंद्रा पर उत्पल कुमार चौधरी, कृष्णा चक्रवर्ती और सुदीप पॉल के साथ मिलकर उनके साथ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाया। प्राथमिकी में बताया गया कि आरोपियों ने श्री मलानी को त्रिपुरा सरकार की ऐसी टेंडर परियोजनाओं में निवेश करने के लिए उकसाकर 14.55 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की, जो असल में मौजूद ही नहीं थीं।

एनसीसी पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की कई धाराओं के तहत जांच शुरू की। इन धाराओं में 61(2), 204, 316(3), 316(5), 318(4), 319(2), 336(3), 338, 340(2), 341(2) और 3(5) शामिल हैं।

धोखाधड़ी का यह मामला फरवरी 2024 में उस समय शुरू हुआ, जब श्री मलानी की मुलाकात अभिषेक चंद्रा से हुई। चंद्रा ने अपने को सरकारी टेंडर- खासकर उच्च शिक्षा निदेशालय, बिजली विभाग और मिड-डे मील योजना से जुड़े टेंडर का अधिकारी बताया। शिकायतकर्ता ने त्रिपुरा सरकार में विशेष सचिव, योजना (सांख्यिकी) के तौर पर चंद्रा के पद की पुष्टि करने के बाद उनकी बातों पर भरोसा किया। उन्होंने चंद्रा द्वारा उनकी फर्म को मुनाफे वाले सरकारी ठेका लेने के लिए मनाने का आरोप लगाया।

श्री मलानी ने चंद्रा की सलाह पर त्रिपुरा सरकार के टेंडर में हिस्सा लेने के लिए कृष्णा चक्रवर्ती (जिनका प्रतिनिधित्व उनके पति सुदीप पॉल कर रहे थे) के साथ एक संयुक्त उद्यम शुरू किया। इसके बाद 4 सितंबर 2024 को एक संयुक्त उद्यम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जो खास तौर पर त्रिपुरा में मिड-डे मील आपूर्ति के ठेके के लिए था। शिकायत के अनुसार आरोपी के कहने पर 'शिक्षा निदेशालय, त्रिपुरा' के पक्ष में डिमांड ड्राफ्ट के जरिए बतौर 'बयाना राशि' (ईएमडी) बड़ी रकम जमा की गई थी।

शिकायत में कहा गया है कि सितंबर 2024 और फरवरी 2025 के बीच महाराष्ट्र में एक बैंक खाते में आधिकारिक दिखने वाले टेंडर दस्तावेज और आदेश मिलने के बाद फर्म ने ईएमडी और टेंडर से जुड़े दूसरे भुगतान के तौर पर 14,55,42,945 रुपये का भुगतान किया। शिकायत में इसके अलावा आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने नयी दिल्ली और अगरतला में बैठकों के इंतजामात किए, शिकायतकर्ता की मुलाकात सरकारी अधिकारी और बैंकर बनकर आए लोगों से करवाई, बातचीत के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए और शिकायतकर्ता को लगातार ठेका मिलने और लंबित भुगतान का भरोसा दिलाता रहा।

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