अगरतला , सितंबर 05 -- त्रिपुरा की राजधानी अगरतला स्थित रामकृष्ण मिशन स्कूल ऑफ लैंग्वेजेस में राज्य के पहले विदेशी भाषा प्रशिक्षण संस्थान की शुरुआत के साथ ही राज्य ने अपने युवाओं के लिए विदेशी भाषा शिक्षा और रोजगार की संभावनाओं को बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है।
त्रिपुरा कौशल विकास मिशन के सहयोग से संचालित यह केंद्र जर्मन, स्पेनिश, फ्रेंच, जापानी और अंग्रेजी भाषा का प्रशिक्षण दे रहा है, जिससे छात्रों और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए वैश्विक बाजार में करियर बनाने के नये रास्ते खुल गये हैं।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री माणिक साहा के ओएसडी परमानंद सरकार बनर्जी ने युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने में विदेशी भाषा के ज्ञान को बेहद अहम बताया।
उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल से छात्र राज्य से बाहर भी अवसरों को तलाश सकेंगे और वैश्विक बाजार की बदलती जरूरतों के हिसाब से खुद को ढाल पायेंगे।
इस कदम को त्रिपुरा में कौशल विकास के क्षेत्र में एक बड़ा योगदान माना जा रहा है।
कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि विदेशी भाषाओं में महारत हासिल करने से युवाओं को केवल नौकरियों में ही फायदा नहीं मिलेगा, बल्कि पर्यटन, आतिथ्य, शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भाषा से जुड़ी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजी और दुनिया भर में बोली जाने वाली अन्य प्रमुख भाषाओं के अलावा जापानी एवं चीनी जैसी भाषाओं की जानकारी युवाओं के लिए अनुवादक, दुभाषिये और भाषा विशेषज्ञ के रूप में करियर के दरवाजे खोल सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी मांग बढ़ेगी।
कौशल विकास विभाग के निदेशक प्रदीप के. ने कहा कि त्रिपुरा सरकार और रामकृष्ण मिशन के बीच यह साझेदारी इसलिए की गयी है, ताकि छात्रों को अपने ही राज्य में विदेशी भाषाओं का पेशेवर प्रशिक्षण मिल सके।
इस पहल को राज्य की व्यापक कौशल विकास रणनीति में विशेष भाषा शिक्षा को शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआती कदम के रूप में देखा जा रहा है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कौशल विकास को केवल तुरंत नौकरी मिलने तक सीमित नहीं रखना चाहिए।
उनके मुताबिक इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य युवाओं के व्यावसायिक कौशल, आत्मविश्वास और नैतिक मूल्यों को बढ़ाकर उनका समग्र विकास करना होना चाहिए। यह नया संस्थान आगे चलकर पर्यटन और आतिथ्य के साथ-साथ उन उभरते उद्योगों में भी रोजगार के अवसर पैदा करेगा, जहां विदेशी भाषाओं का ज्ञान लगातार जरूरी होता जा रहा है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित