अगरतला , अक्टूबर 25 -- त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने रविवार को पूर्ववर्ती वाम पंथी सरकार के कार्यकाल में हुए हत्या के मामलों के रिकॉर्ड को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि आधिकारिक रिकॉर्ड से अहम् दस्तावेज गायब हैं।
श्री साहा के इस बयान ने पुराने मामलों, जांच की स्थिति और अतीत की राजनीतिक हिंसा के लिए जिम्मेदारी तय करने को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने विपक्षी दलों, मुख्य रूप से वामपंथी और कांग्रेस की आलोचना करते हुए ये आरोप लगाए।
उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह मौजूदा सरकार के कार्यकाल की कानून-व्यवस्था की आलोचना करके जनता का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वे खुद अपने शासनकाल की गंभीर घटनाओं को नजरअंदाज कर रहे हैं।
डॉ. साहा ने त्रिपुरा में हत्या और हिंसा के इतिहास का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि क्या विपक्ष अपने कार्यकालके दौरान हुए गंभीर अपराधों से खुद को अलग कर सकता है? अगर फाइलें गायब होने की पुष्टि होती है, तो जांचकर्ताओं को सबूत सुरक्षित रखने और मामलों की जांच आगे बढ़ाने में और अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही पीड़ितों के परिवारों को भी उनके सवालों के जवाब मिलने में मुश्किल हो सकती है।
यह मुद्दा इसलिए भी बेहद संवेदनशील है, क्योंकि 2018 के विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले त्रिपुरा में दो पत्रकारों की हत्या कर दी गई थी। इन मामलों पर आज भी लोगों का ध्यान जाता है और जांच को लेकर चिंता बनी रहती है।
मुख्यमंत्री की टिप्पणी ने केस रिकॉर्ड तक पहुंच और इस बात पर नया ध्यान खींचा है कि क्या जांचकर्ताओं ने सभी सुरागों पर ठीक से काम किया था। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार पर कानून-व्यवस्था को ठीक से न संभाल पाने का आरोप लगाने से पहले, विपक्षी दलों को अपने खुद के कार्यकाल के रिकॉर्ड पर जवाब देना चाहिए।
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