अगरतला , मई 26 -- त्रिपुरा के पशु संसाधन विकास एवं मत्स्य पालन मंत्री सुधांगसु दास ने केंद्र से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के मौजूदा वित्तपोषण मॉडल का पुनर्मूल्यांकन करने की अपील की है और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए अधिक लाभकारी लागत-साझाकरण योजना की वकालत की है।
आइजोल में आयोजित क्षेत्रीय समीक्षा बैठक के दौरान श्री दास ने केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में, पशुधन एवं मत्स्य पालन विकास कार्यक्रमों के सुदृढ़ सहयोग और त्वरित कार्यान्वयन का आह्वान किया। उन्होंने ग्रामीण आजीविका में सुधार, घरेलू आय में वृद्धि, पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करने और समग्र कृषि विकास में योगदान देने में पशु संसाधन एवं मत्स्य पालन क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री माणिक साहा के नेतृत्व में त्रिपुरा मुख्यमंत्री मत्स्य विकास योजना को सक्रिय रूप से लागू कर रहा है, जो स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए तालाब विकास और मत्स्य संसाधनों के वितरण जैसी पहलों पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि यद्यपि पूर्वोत्तर में दूध, मांस और अंडे के उत्पादन की पर्याप्त क्षमता है, फिर भी विशेषकर डेयरी और मुर्गी पालन उद्योगों में उल्लेखनीय कमियां हैं।
उन्होंने बताया कि त्रिपुरा ने मांस उत्पादन में अधिशेष हासिल कर लिया है और पड़ोसी राज्यों से आयात पर निर्भर नहीं है, फिर भी दूध और अंडे के उत्पादन में वृद्धि की काफी गुंजाइश है।
एक महत्वपूर्ण मुद्दा पीएमएमएसवाई के तहत केंद्र और राज्य के बीच मौजूदा 60:40 के वित्तपोषण अनुपात को लेकर उठाया गया, जिसके बारे में उन्होंने तर्क दिया कि यह क्षेत्र की प्रमुख आबादी, छोटे और सीमांत किसानों पर अनुचित दबाव डालता है। उन्होंने अधिक प्रभावी और समावेशी कार्यान्वयन प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए पूर्वोत्तर राज्यों के लिए इस अनुपात को 90:10 करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने समय पर निधि वितरण की आवश्यकता पर बल दिया, जो आदर्श रूप से सितंबर से पहले होना चाहिए, क्योंकि मत्स्य पालन अवसंरचना परियोजनाएं आमतौर पर सितंबर और मार्च के बीच कार्यान्वित की जाती हैं।
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