अगरतला , अप्रैल 04 -- मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने दोहराया है कि त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (एडीसी) चुनाव केवल एक चुनाव नहीं बल्कि इतिहास रचने का दिन है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इसमें अधिकांश सीटें जीतेगी। इसके साथ ही उन्होंने पिछले पांच वर्षों के 'टिपरा मोथा' के शासन की आलोचना की।
डॉ. साहा ने सिपाहीजाला जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए दावा किया कि जनजातियों के विकास के लिए एडीसी को करोड़ों रुपये आवंटित किये गये थे लेकिन दुर्भाग्य से टिपरा मोथा के नेताओं ने वह धन हड़प लिया या उसे विदेश यात्राओं पर खर्च कर दिया।
उन्होंने कहा, "एडीसी में भ्रष्टाचार की सबसे अधिक रिपोर्टें तब आईं जब सी.के. जमातिया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बने, जो टिपरा मोथा में शामिल हो गए और अब वह चुनाव लड़ रहे हैं। यह चुनाव समाप्त होने दीजिए, राज्य सरकार उन भ्रष्ट गिरोहों का पता लगाने के लिये विशेष जांच करेगी जिन्होंने गरीबों के धन को लूटा है।"श्री जमतिया त्रिपुरा सिविल सेवा के अधिकारी थे जिन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नत किया गया था और वह वाम मोर्चा सरकार के दौरान पसंदीदा अधिकारियों में से एक थे। वर्ष 2018 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद, वह धीरे-धीरे श्री प्रद्योत किशोर देबबर्मा के करीब हो गये, जिन्होंने उन्हें एडीसी में मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में नियुक्त किया और इसके बाद वह मोथा में शामिल हो गए।
मुख्यमंत्री ने कहा, "एडीसी में माकपा और क्षेत्रीय दलों ने शासन किया है लेकिन लोगों को कुछ नहीं मिला। भाजपा के आने के बाद, इसने स्वदेशी समुदाय के आठ प्रतिभाशाली व्यक्तियों को 'पद्म श्री' से सम्मानित किया है। हमने जिला और उप-मंडल स्तर पर केवल जनजातीय योजनाओं की देखरेख के लिए नामित अधिकारियों को नियुक्त करने का निर्णय लिया है।"डॉ. साहा ने योजना पर प्रकाश डालते हुए रेखांकित किया, "हम एडीसी क्षेत्रों में दो चिकित्सा महाविद्यालय स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, इसके अलावा खुमलुंग में एक परिचर्या (नर्सिंग) और पैरामेडिकल महाविद्यालय तथा राष्ट्रीय स्तर के स्कूल स्थापित किये जायेंगे।"मुख्यमंत्री ने टिपरा मोथा पर झूठे आधारों और सफेद झूठ का सहारा लेकर राज्य का जातीय ध्रुवीकरण करने और दंगे जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इसके संस्थापक साधारण सोच वाले आदिवासियों को गुमराह करने के लिए बंगलादेश के चटगांव पर्वतीय क्षेत्रों और कॉक्स बाजार बंदरगाह को शामिल करते हुए 'ग्रेटर टिपरालैंड' का सपना बेच रहे हैं, जबकि यह नारा पूरी तरह से निरर्थक है।
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