अगरतला , अक्टूबर 11 -- त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने लापरवाही से गाड़ी चलाने के मामले में एक व्यक्ति की सज़ा को तो बरकरार रखा, लेकिन उसकी जेल की सज़ा को आठ हजार रुपये के जुर्माने में बदल दिया है। यह मामला उदयपुर के तत्कालीन सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर (एसडीपीओ)की सरकारी गाड़ी से टक्कर होने से जुड़ा था।
न्यायमूर्ति बिस्वजीत पालित ने गोमती ज़िले के माताबाड़ी निवासी अर्जुन सरकार की ओर से दायर एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर फ़ैसला सुनाते हुए यह आदेश दिया। सरकार ने सत्र न्यायालय द्वारा बरकरार रखी गई सज़ा को चुनौती दी थी।
गोमती ज़िले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने 16 नवंबर, 2023 को सरकार को भारतीय दंड संहिता (भादस) की धारा 279 और मोटर वाहन अधिनियम की धाराओं 179, 180 और 184 के तहत दोषी ठहराया था। सत्र न्यायाधीश ने 5 अगस्त, 2024 को इस दोषसिद्धि और सज़ा को बरकरार रखा था।
तत्कालीन उदयपुर एसडीपीओ, ध्रुबा नाथ को सूचना मिली कि 28 अक्टूबर, 2021 को संदिग्ध नशीले पदार्थ ले जा रही एक मारुति सुजुकी ऑल्टो माताबाड़ी की ओर जा रही है। नाथ ने पुलिसकर्मियों के साथ इस सूचना की पुष्टि के लिए उदयपुर में 'बाज़ार इंडिया' के पास के इलाके का दौरा किया। जैसे ही कार पास आई, अधिकारियों ने चालक को रुकने का इशारा किया लेकिन चालक कथित तौर पर तेज़ी से भागने लगा और एसडीपीओ की सरकारी गाड़ी को टक्कर मार दी।
पुलिस ने बेतरतीब ढंग से कार को चलाये जाने के कारण उसका पीछा किया और इस दौरान वह पेराटिया फॉरेस्ट ड्रॉप गेट के पास पलट गई। तलाशी में कथित तौर पर विदेशी शराब की 55 बोतलें मिलीं और पुलिस को पता चला कि ड्राइवर के पास लाइसेंस नहीं था।
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