अगरतला , मई 15 -- त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने अगरतला नगर निगम (एएमसी) और पुलिस कर्मियों के खिलाफ मारपीट, भ्रष्टाचार, पुलिस की ज्यादतियों तथा पक्षपातपूर्ण जांच के आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी ) गठित करने का आदेश दिया है।

यह फैसला मुख्य न्यायाधीश एम.एस. रामचंद्र राव और न्यायमूर्ति बिस्वजीत पालित की खंडपीठ ने त्रिपुरा राज्य और अन्य के खिलाफ रत्ना रॉय द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। न्यायालय ने कहा कि एसआईटी में त्रिपुरा पुलिस की अपराध शाखा के अधिकारी शामिल होंगे, जिनकी नियुक्ति पुलिस महानिदेशक करेंगे। यह टीम महानिरीक्षक (आईजी ) रैंक के किसी अधिकारी की देखरेख में काम करेगी।

न्यायालय ने निर्देश दिया है कि इस जांच में पश्चिम त्रिपुरा जिले का कोई भी पुलिस अधिकारी शामिल नहीं होगा। पश्चिम त्रिपुरा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जब्त की गयी सीसीटीवी फुटेज अदालत के आदेशानुसार, उचित रसीद के साथ पर्यवेक्षक आईजी अधिकारी को सौंप दी जाएगी। पर्यवेक्षक अधिकारी को न्यायालय में एक सीलबंद लिफाफे में जांच की प्रगति रिपोर्ट (स्टेटस रिपोर्ट) जमा करनी होगी। न्यायालय के निर्देशानुसार, अगरतला नगर निगम के आयुक्त को इस मामले में अपना जवाब (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 17 जून को होगी।

याचिका के अनुसार, रत्ना रॉय, उनके पति और पुत्र सैकत साहा अगरतला के धलेश्वरी स्थित अपने परिसर में निर्माण कार्य करवा रहे थे। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति ने रॉय के निर्माण कार्य के संबंध में अगरतला नगर निगम में शिकायत दर्ज कराई थी। याचिकाकर्ता ने आगे आरोप लगाया कि अगरतला नगर निगम के कर्मचारी और एक विशेष पुलिस अधिकारी बार-बार निर्माण स्थल पर आते थे, अवैध रूप से पैसे की मांग करते थे और काम में बाधा डालते थे। आरोप है कि एएमसी की टीम ने याचिकाकर्ता के बेटे के साथ उनके किराए के घर पर मारपीट की, और बाद में पूर्वी अगरतला थाना में पुलिस कर्मियों की मौजूदगी में भी उसके साथ मारपीट की गई।

याचिका के अनुसार, शिकायत दर्ज कराने के बावजूद कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई और पुलिस अधिकारियों द्वारा कोई प्रभावी जांच शुरू नहीं की गई। उच्च न्यायालय में 29 अप्रैल को याचिका दायर करने से पहले उन्होंने सबसे पहले पश्चिम त्रिपुरा के पुलिस अधीक्षक और पुलिस महानिदेशक से संपर्क किया था।

रिट याचिका में प्राथमिकी दर्ज करने, पूर्वी अगरतला थाना के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने और अन्य उचित निर्देश देने की मांग की गयी है। 29 अप्रैल को रिट याचिका दायर किए जाने के बावजूद कानून के उल्लंघन के गंभीर आरोपों के होते हुए भी सरकारी वकील एक हफ़्ते बाद भी निर्देश हासिल नहीं कर पाए।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित