अगरतला , मई 08 -- त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने सरकारी कर्मचारियों के एक नागरिक के साथ मारपीट के गंभीर आरोपों के बावजूद पुलिस के एफआईआर दर्ज न करने से राज्य सरकार से जवाबदेही और स्पष्टीकरण मांगा है।

मुख्य न्यायाधीश एम एस रामचंद्र राव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने शहर के धलेश्वर क्षेत्र की निवासी रत्ना रॉय की दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए पश्चिम त्रिपुरा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) को निर्देश दिया कि वे चार से छह अप्रैल तक की पूर्वी अगरतला पुलिस स्टेशन की सीसीटीवी फुटेज को तुरंत हासिल करें और सुरक्षित रखें।

याचिका के अनुसार, रत्ना रॉय ने छह अप्रैल को पूर्वी अगरतला महिला पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराया था कि रवींद्रनाथ घोष के नेतृत्व में अगरतला नगर निगम (एएमसी) के कर्मचारियों के एक समूह ने उनके बेटे के साथ मारपीट की, क्योंकि उसने रिश्वत में दो लाख रुपये नकद देने से इनकार कर दिया था।

घटना चार अप्रैल की रात की है, जब आरोपी व्यक्ति शिकायतकर्ता के किराये के आवास में घुस गये और दो लाख रुपये की मांग की। जब रत्ना रॉय के बेटे ने भुगतान करने से मना कर दिया, तो उसे कथित तौर पर बांध दिया गया और उसके साथ मारपीट की गयी। बेटे को बचाने की कोशिश के दौरान शिकायतकर्ता और उनके पति पर भी हमला किया गया।

इसके बाद आरोपी घायल युवक को पूर्वी अगरतला पुलिस स्टेशन ले गये, जहां उसे अपमान और धमकियों का सामना करना पड़ा। याचिका में आगे आरोप लगाया गया है कि गंभीर आरोपों और संज्ञेय अपराधों के दावों के बावजूद पुलिस ने घटना के दो दिन बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की।

यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिस प्रशासन के पास बार-बार गुहार लगाने के बाद भी शिकायतकर्ता को प्रक्रियात्मक निष्क्रियता का सामना करना पड़ा। अदालत ने निर्देश दिया कि सबूतों के साथ किसी भी संभावित छेड़छाड़ या उन्हें नष्ट होने से बचाने के लिए फुटेज को तुरंत कब्जे में लिया जाए।

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