रायपुर , अगस्त 22 -- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में त्योहारी सीजन की शुरुआत से पहले प्याज और शक्कर की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। रसोई गैस की कीमतों और किल्लत से राहत मिलने के बाद अब आवश्यक खाद्य वस्तुओं में आई तेजी का असर घरेलू बजट के साथ होटल, भोजनालय और मिष्ठान कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है।
राजधानी के खुदरा बाजार में पिछले करीब एक सप्ताह के दौरान प्याज के दाम 15 से 20 रुपए प्रति किलो तक बढ़े हैं। एक सप्ताह पहले तक 35 से 40 रुपए प्रति किलो बिक रहा प्याज अब 50 से 55 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। इसी अवधि में थोक बाजार में प्याज का भाव 25-26 रुपए से बढ़कर 40-42 रुपए प्रति किलो हो गया है।
थोक कारोबारियों के अनुसार इस वर्ष प्याज की फसल अपेक्षाकृत कमजोर रही है। कुछ क्षेत्रों में फसल में रोग लगने से उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके अलावा पुराने स्टॉक का एक हिस्सा खराब होने और बारिश के कारण आवक प्रभावित होने से बाजार में प्याज की उपलब्धता घटी है।
कारोबारियों ने बताया कि रायपुर के बाजार में प्याज की प्रमुख आवक महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र से होती है। सितंबर में दक्षिण भारत से नई आवक शुरू होने के बाद कीमतों में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं नवंबर-दिसंबर में नई फसल की आवक बढ़ने के साथ भाव में और सुधार होने की संभावना जताई जा रही है।
प्याज की महंगाई का असर होटल और भोजनालयों की लागत पर भी पड़ने लगा है। विभिन्न सब्जियों और व्यंजनों में प्याज का बड़े पैमाने पर उपयोग होने के कारण इसके भाव लगातार ऊंचे बने रहने पर भोजन तैयार करने की लागत बढ़ सकती है। कारोबारियों का कहना है कि कीमतों में तेजी इसी तरह जारी रही तो आने वाले समय में मेन्यू की कीमतों में बदलाव करना पड़ सकता है।
इधर, प्याज के साथ शक्कर की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। शहर में शक्कर का भाव करीब 71 रुपए किलो तक पहुंच गया है। मिष्ठान कारोबारियों के मुताबिक शक्कर के साथ काजू, बादाम और अन्य सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी से मिठाइयों की उत्पादन लागत बढ़ रही है। यदि शक्कर की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो त्योहारों के दौरान मिठाइयों के दाम भी बढ़ सकते हैं और ग्राहकों को इसके लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
दूसरी ओर कमजोर मानसून और कम बुवाई के कारण चना, अरहर और उड़द जैसी दालों की कीमतों पर भी दबाव बना हुआ है। कुछ बाजारों में दालों के दाम 4 से 6 रुपए किलो तक बढ़ने की बात सामने आई है। हालांकि स्थानीय थोक कारोबारियों के अनुसार फिलहाल दालों की कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।
थोक कारोबारियों ने प्याज और शक्कर के बढ़ते भाव के पीछे जमाखोरी और मुनाफाखोरी की आशंका से इनकार किया है। उनके अनुसार कमजोर फसल, पुराने स्टॉक का खराब होना, आवक में कमी और मौजूदा बाजार परिस्थितियां कीमतों में वृद्धि की प्रमुख वजह हैं। कारोबारियों को उम्मीद है कि नई फसल बाजार में आने और आपूर्ति बढ़ने के बाद नवंबर-दिसंबर तक उपभोक्ताओं को कीमतों में राहत मिल सकती है।
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