नयी दिल्ली , जुलाई 22 -- आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के तोतापुरी आम उत्पादक किसानों की गिरती आय और मंडियों में दाम टूटने की शिकायतों के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों पर समीक्षा कर तोतापुरी आम की खेती, प्रसंस्करण और बाज़ार व्यवस्था में व्यापक सुधार के निर्देश दिये हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में यहां तोतापुरी आम की मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए हुई समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए गए। इस मामले में गत दो जुलाई को एक समिति बनायी गयी थी और इसमें सीआईएसएच, आईआईएचआर बेंगलुरु के वैज्ञानिक, डॉ. वाईएसआर उद्यानिकी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ और राज्य उद्यानिकी विभाग के अधिकारी शामिल थे।
समिति ने 8 से 10 जुलाई के दौरान आंध्र प्रदेश के तिरुपति और चित्तूर जिलों का दौरा कर किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), मंडी प्रतिनिधियों, पल्प इकाइयों और निर्यातकों से चर्चा की थी।
रिपोर्ट के अनुसार, तोतापुरी आम की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण प्रसंस्करण क्षमता और खरीद में समन्वय का अभाव, पेय पदार्थाें में वास्तविक गूदे की कमी और वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव हैं। समिति ने आम-आधारित पेयों में 22 से 25 प्रतिशत तक प्राकृतिक गूदा अनिवार्य करने का सुझाव दिया। साथ ही, निर्धारित सीमा से अधिक गूदे वाले पेयों पर 5 प्रतिशत की रियायती जीएसटी दर लागू करने की सिफारिश की। इस पर केंद्रीय मंत्री ने एफएसएसएआई, जीएसटी परिषद, वित्त, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि और स्वास्थ्य मंत्रालयों के साथ अंतर-मंत्रालयी बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए।
मूल्य श्रृंखला को स्थिर करने के लिए समिति ने एक 'केंद्रीय समन्वय एवं मूल्य स्थिरीकरण समिति' के गठन का सुझाव दिया, जो हर वर्ष सीज़न से पहले फसल, मांग और लागत की समीक्षा कर संदर्भ मूल्य तय करेगी।
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