तेहरान , मार्च 31 -- ईरान और अमेरिका-इज़रायल के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच राजधानी तेहरान में एक मनोरोग अस्पताल और कैंसर दवाओं के एक प्रमुख उत्पादन केन्द्र पर हमलों की खबरों से चिकित्सा ढांचे की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न हो गयी है।
ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, राजधानी स्थित देलाराम सीना मनोरोग अस्पताल इस सप्ताह देर रातहुए हमले में क्षतिग्रस्त हो गया। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक घटना के समय वहां लगभग 30 मरीज मौजूद थे, हालांकि हताहतों के आंकडों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है।
एक अलग घटना में मंगलवार को कैंसर रोधी दवाओं और एनेस्थेटिक्स के उत्पादन से जुड़े ईरान के एक बड़े संयंत्र को भी निशाना बनाया गया, जिससे आवश्यक दवाओं की आपूर्ति बाधित होने की आशंका जताई जा रही है।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इन हमलों की निंदा करते हुए कहा, "इज़रायल के युद्ध अपराधी अब खुलेआम और बेशर्मी से दवा कंपनियों पर बमबारी कर रहे हैं। उनके इरादे साफ़ हैं, लेकिन वे एक बात समझने में चूक कर रहे हैं कि उनका सामना निहत्थे फ़िलिस्तीनी नागरिकों से नहीं है। हमारी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं इन हमलावरों को कड़ी सज़ा देंगी।"इन हमलों के बीच ईरान ने भी क्षेत्र में अमेरिकी और इज़रायली ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) नौसेना ने बताया कि उसने 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4' के तहत मंगलवार तड़के कई अभियान चलाये।
आईआरजीसी के अनुसार, नौसैनिक बलों ने फारस की खाड़ी के मध्य में इज़रायल से जुड़े एक कंटेनर पोत पर बैलिस्टिक मिसाइलों सहित "भारी" हमला किया। एक अन्य कार्रवाई में संयुक्त अरब अमीरात के तट के पास अमेरिकी मरीन की एक स्थिति को विस्फोटक ड्रोन से नष्ट करने का दावा किया गया।
अमेरिका ने भी संभावित जमीनी अभियान की अटकलों के बीच पोत यूएसएस ट्रिपोली को हिंद महासागर में तैनात किया गया है। अमेरिका के रक्षा विभाग द्वारा 26 मार्च को साझा की गयी तस्वीरों के अनुसार, ट्रिपोली पर 31वें समुद्री अभियान दल के लगभग 1,800 नौसैनिक तैनात हैं।
यह तनाव पिछले महीने ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर हुए हमले के बाद बढ़ा, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच लगातार सैन्य टकराव जारी है और पूरे पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
इज़रायल ने संकेत दिया है कि उसका अभियान आगे भी जारी रहेगा। सैन्य प्रवक्ता नदाव शोशानी ने कहा कि अभियान 'आने वाले कई हफ्तों तक' चल सकता है और सेना के पास पर्याप्त लक्ष्य, हथियार और जनशक्ति उपलब्ध है।
प्रधानमंत्री बेन्जमिन नेतन्याहू ने कहा कि युद्ध अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिहाज से आधे चरण को पार कर चुका है। इस बीच, पश्चिमी सहयोगियों के बीच मतभेद भी खुलकर सामने आ रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की आलोचना करते हुए कहा कि उसने इज़रायल के लिए आपूर्ति ले जा रहे अमेरिकीसैन्य विमानों को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति नहीं दी, जो 'बहुत असहयोगपूर्ण' कदम है।
श्री ट्रंप ने विशेष रूप से ब्रिटेन की आलोचना करते हुए कहा कि जो देश ईरान के खिलाफ कार्रवाई में शामिल नहीं हो रहे हैं, उन्हें अब अपने संसाधनों के लिए स्वयं संघर्ष करना सीखना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे देश अमेरिका से तेल खरीदें या होर्मुज़ जलडमरूमध्य से खुद आपूर्ति सुनिश्चित करें।
उन्होंने नाटो देशों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि संघर्ष के दौरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा में सहयोग न देना 'बड़ी गलती' है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को सहयोगियों की सहायता की आवश्यकता नहीं है, लेकिन 'उन्हें साथ होना चाहिए था।'इटली ने भी सतर्क रुख अपनाया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने पश्चिम एशिया से जुड़े अभियानों के लिए सिसिली स्थित सिगोनेला एयरबेस के उपयोग की अमेरिकी मांग को खारिज कर दिया है।जैसे-जैसे संघर्ष गहराता जा रहा है, नागरिकों की सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाओं की रक्षा को लेकर मानवीय चिंताएं बढ़ रही हैं। सहायता एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि इस टकराव का असर आवश्यक बुनियादी ढांचे पर लगातार बढ़ता जा रहा है।
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