नैनीताल , मई 26 -- उत्तराखंड के प्रतिपक्ष के नेता यशपाल आर्य ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर मंगलवार को केंद्र सरकार और तेल कंपनियों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि "मुनाफा तेल कंपनियों का और घाटा जनता का" जैसी स्थिति बन गई है, जिससे आम आदमी, किसान, छोटे व्यापारी और मध्यम वर्ग लगातार महंगाई की मार झेल रहे हैं।
जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री द्वारा सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 1000 करोड़ रुपये का घाटा होने की बात कही गई जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की तीन प्रमुख तेल कंपनियों के वित्तीय आंकड़े अलग तस्वीर पेश करते हैं। उन्होंने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में इन कंपनियों ने करीब 19,470 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 41 प्रतिशत अधिक है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कंपनियां इतने बड़े लाभ में थीं तो अचानक घाटे की स्थिति कैसे सामने आ गई। उन्होंने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और युद्ध का हवाला दिया जा रहा है, तो यह भी ध्यान देने योग्य है कि युद्ध 28 फरवरी से शुरू हुआ था और उसका आर्थिक प्रभाव अप्रैल से माना जा सकता है। ऐसे में कथित घाटे की अवधि लगभग 40 दिनों की ही बनती है।
श्री आर्य ने कहा कि 10 मई के बाद लगातार तेल की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। इससे जनता के बीच यह धारणा मजबूत हो रही है कि सीमित अवधि के संभावित नुकसान को आधार बनाकर लंबे समय तक कीमतें बढ़ाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों के घाटे की भरपाई जनता की जेब से करना उचित नहीं है, जबकि इससे पहले कंपनियां हजारों करोड़ रुपये का मुनाफा कमा चुकी हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवहन महंगा होने से खाद्यान्न, सब्जियों और अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम भी बढ़ जाते हैं। खेती की लागत बढ़ती है और छोटे कारोबार प्रभावित होते हैं, जिससे हर परिवार का बजट बिगड़ता है।
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