नयी दिल्ली , अप्रैल 18 -- पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भारत की ओर से खनिज तेल और गैस के क्षेत्र में डेटा ( सूचना) और उसमें भागीदारी को प्रोत्साहित किये जाने के कदमों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि " भारत अंधेरे में हाथ मारने की जगह, सूचना आधारित खोज के लिए तैयार है।"उन्होंने समुद्र मंथन - राष्ट्रीय अपतटीय मिशन के तहत विस्तारित उत्खनन एजेंडा के संदर्भ में हाइड्रोकार्बन (खनिज तेल-गैस) महानिदेशालय (डीजीएच) द्वारा आयोजित "डेटा संचालित उत्खनन" पर एक सम्मेलन को लेकर सोशल मीडिया पर एक टिप्पणी में कहा कि भारत अब उत्खनन के क्षेत्र में अंधेरे में खोज करने के दौर से आगे बढ़ रहा है और डेटा के आदान प्रदान के एक साहसिक बहु-ग्राहक मॉडल को अपना रहा है जिसमें अधिकाधिक लोगों को सूचनाओं की व्याख्या करने, नवाचार करने और खोज करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि इससे उत्खनन एवं उत्पादन को अनिश्चितता के क्षेत्र के रूप में माने जाने वाले दृष्टिकोण में निर्णायक रूप से बदलाव आ रहा है।
पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि समुद्र मंथन के साथ, ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में हमारी खोज को पूरा करने के लिए खुलेपन, सहयोग और अत्याधुनिक विज्ञान के माध्यम से भारत की विशाल अपतटीय क्षमता को सामने लाया जा रहा है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की शनिवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार सम्मेलन का उद्देश्य एक मजबूत डेटा प्रक्रियात्मक तंत्र के माध्यम से भारत के उत्खनन परिणामों में तेजी लाने के लिए उद्योग जगत को शामिल करना था।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ नीरज मित्तल की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में 80 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, डीजीएच, राष्ट्रीय तेल कंपनियां, वैश्विक उत्खनन एवं उत्पादन (ईएंडपी) क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां (बीपी, एक्सॉनमोबिल, शेल आदि), भारत की निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियां ( रिलायंस इंडस्ट्रीज, केयर्न इंडिया, इन्वेनायर एनर्जी, अदानी वेल्सपन एक्सप्लोरेशन) और अग्रणी भूकंपीय सेवा प्रदाता एवं प्रौद्योगिकी कंपनियां (टीजीएस, विरिडियन, शीयरवाटर जियोसर्विसेज, एसएलबी, वेव जियो सर्विसेज) शामिल थीं।
सम्मेलन का उद्देश्य अपतटीय और सीमावर्ती बेसिन विकास पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करते हुए उत्खनन परिणामों को सक्षम बनाने में भूकंपीय डेटा की भूमिका पर उद्योग के हितधारकों को शामिल करना था।
सम्मेलन में सबकी राय स्पष्ट थी कि भूकंपीय डेटा की उपलब्धता, गुणवत्ता और सुलभता सीधे तौर पर उत्खनन परिणामों को निर्धारित करती है। प्रतिभागियों ने इस बात का उल्लेख किया कि डेटा कवरेज में कमियां, विशेष रूप से सीमावर्ती और गहरे पानी के बेसिनों में, बेसिन की संभावनाओं, निवेश प्रवाह और उत्खनन की तीव्रता को सीमित करती रहती हैं।
सम्मेलन में यह भी कहा गया कि इमेजिंग प्रौद्योगिकियों और एआई-संचालित व्याख्या में हुई प्रगति का लाभ उठाते हुए, पुराने डेटा सेटों के पुनर्संसाधन और पुनर्व्याख्या के माध्यम से महत्वपूर्ण तथ्य प्राप्त किए जा सकतें है।
प्रतिभागियों ने आगामी लाइसेंसिंग दौरों के अनुरूप लक्षित और त्वरित भूकंपीय डेटा आत्मसात की आवश्यकता पर बल दिया ।
डेटा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने में सरकार की भूमिका के महत्व को रेखांकित करते हुए सम्मेलन की सिफारिशों में कहा गया है कि इस क्षेत्र में नीतिगत समर्थन, डेटा जुटाने में के काम में निरंतर निवेश और आकंड़ो तक पहुंच संबंधी व्यवस्था (एनडीआर) को मजबूत करना महत्वपूर्ण है ।
सम्मेलन में कहा गया कि इस क्षेत्र में उद्योग की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत स्पष्टता और नीतियों को पूर्वानुमान के लिए तत्पर रखना जरूरी है।
सम्मेलन की चर्चाओं के आधार पर सिफारिश की गयी कि तेल और गैस प्रखंडों की आगामी नीलामियां के दौर के अनुरूप, सीमावर्ती और गहरे जल बेसिनों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, प्राथमिकता के आधार पर भूकंपीय डेटा अधिग्रहण का एक रोडमैप तैयार किया जाना चाहिए।
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