हैदराबाद , मार्च 11 -- तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष गद्दाम प्रसाद कुमार ने बुधवार को विधायक दानम नागेंद्र और कडियम श्रीहरि के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि इन दोनों विधायकों ने अपनी राजनीतिक पार्टियां बदली हैं।
ये दोनों विधायक भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के टिकट पर निर्वाचित होने और बाद में सत्तारूढ़ कांग्रेस को समर्थन देने के बाद दलबदल के आरोपों का सामना कर रहे थे।
विधानसभा अध्यक्ष ने पिछले सप्ताह दानम नागेंद्र और कडियम श्रीहरि के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बुधवार को उन्होंने अंतिम निर्णय की घोषणा करते हुए बीआरएस विधायकों द्वारा उनकी अयोग्यता की मांग करने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया।
इससे पहले अध्यक्ष ने उन्हीं आरोपों का सामना कर रहे आठ अन्य विधायकों के खिलाफ भी इसी तरह की याचिकाओं को खारिज कर दिया था। ताजा फैसले के साथ, दलबदल के मामलों में क्लीन चिट पाने वाले विधायकों की कुल संख्या दस हो गई है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष एन रामचंद्र राव ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह निर्णय लोकतंत्र की भावना के विपरीत है।
श्री राव ने मीडिया से कहा कि यह फैसला आश्चर्यजनक है, जबकि इस बात के स्पष्ट सबूत थे कि एक पार्टी के टिकट पर निर्वाचित विधायक छह महीने के भीतर दूसरी पार्टी में शामिल हो गया और उस पार्टी के उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा। उन्होंने कहा कि पूरी जनता इन घटनाओं की गवाह रही है। यह लोकतंत्र का अपमान और जनता द्वारा दिए गए जनादेश की अवहेलना के अलावा और कुछ नहीं हैं।
भाजपा नेता ने इस मुद्दे पर राहुल गांधी के रुख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने उल्लेख किया कि दलबदल विरोधी कानून पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान एक संवैधानिक संशोधन के माध्यम से पेश किया गया था, लेकिन अब उस कानून का उल्लंघन किया जा रहा है।
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