हैदराबाद , अप्रैल 10 -- तेलंगाना सरकार महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित ईंट निर्माण इकाइयों को भरपूर मदद दे रही है जिससे एक ओर जहां आजीविका के अवसर पैदा हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आवास निर्माण की पहलों को भी समर्थन मिल रहा है।
'एसईआरपी' के राज्यव्यापी सर्वेक्षण में ऐसी 736 इकाइयों की पहचान की गई है, जिनमें से कई का वर्तमान में पूरी तरह से उपयोग नहीं हो पा रहा है। ये इकाइयां अपनी 2,500 ईंटों की संभावित क्षमता के मुकाबले प्रतिदिन केवल 300 से 1,000 ईंटों का उत्पादन कर रही हैं। वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और बेहतर बुनियादी ढांचे के माध्यम से उत्पादन क्षमता बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।
पी.एम.ई.जी.पी. और स्त्री निधि जैसी योजनाओं के तहत 35 प्रतिशत तक की छूट के साथ ऋण दिए जा रहे हैं, जबकि धन की त्वरित स्वीकृति की सुविधा के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई है। इसके अलावा, महिलाओं को इन इकाइयों को कुशलतापूर्वक चलाने के लिए आवश्यक तकनीकी और प्रबंधकीय कौशल से लैस करने हेतु 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि 'इंदिरम्मा' आवास परियोजनाओं के लिए आवश्यक ईंटें इन्हीं महिला संचालित इकाइयों से खरीदी जाएं, जिससे बाजार का सुनिश्चित समर्थन प्राप्त हो सके। इससे ईंटों की निरंतर मांग बनी रहेगी और विपणन की चुनौतियां भी समाप्त हो जाएंगी।
अधिकारियों ने कहा कि इस पहल का दोहरा लाभ है-ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थायी रोजगार पैदा करना और सरकारी आवास कार्यक्रमों के लिए निर्माण सामग्री की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करना।
इस प्रभाव को रेखांकित करते हुए, अधिकारियों ने सिद्दीपेट जिले की कुंटा मल्ला वाणी की सफलता का उदाहरण दिया, जिन्होंने वित्तीय सहायता से एक ईंट इकाई स्थापित की और अब दूसरों को रोजगार देने के साथ-साथ एक स्थिर मासिक आय अर्जित कर रही हैं। उनके इस उद्यम ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिरता में सुधार किया है, बल्कि उन्हें घर बनाने और अपने बच्चों की शिक्षा में सहायता करने में भी सक्षम बनाया है।
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