हैदराबाद , अप्रैल 16 -- तेलंगाना सरकार ने अपना व्यापक सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, रोजगार, राजनीतिक और जाति सर्वेक्षण जारी कर दिया है। इसके अनुसार राज्य की कुल 3,55,50,759 की कुल आबादी में पिछड़ा वर्ग की आबादी 56.33 प्रतिशत है, जिसमें 10.08 प्रतिशत पिछड़े मुस्लिम शामिल हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति की आबादी 17.43 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति 10.45 प्रतिशत और अन्य जातियों की 15.79 प्रतिशत है।
पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने बुधवार को सचिवालय में एक संवाददाता सम्मेलन में यह सर्वेक्षण जारी किया। श्री प्रभाकर ने कहा कि रिपोर्ट पर राज्य विधानसभा में पहले ही चर्चा हो चुकी है और सरकार ने इससे मिले नतीजों के आधार पर पिछड़े वर्गों के लिए 42 प्रतिशत आरक्षण की मांग करते हुए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
राज्य के पिछड़ा वर्ग के भीतर, रेड्डी समुदाय 30.47 प्रतिशत के साथ सबसे बड़ा समूह हैं। अन्य समूहों में मुस्लिम (11.08 प्रतिशत), वैश्य (9.07 प्रतिशत), कम्मा (6.56 प्रतिशत), ब्राह्मण (5.98 प्रतिशत) और वेलमा (2.56 प्रतिशत) आते हैं। एक रोचक बात यह भी सामने आयी है कि अन्य वर्ग श्रेणी के 21.49 प्रतिशत व्यक्तियों ने अपनी जाति की पहचान उजागर नहीं की। अगर संख्या के रूप में देखें तो ये 12 लाख से अधिक हैं।
सर्वेक्षण में शिक्षा, रोजगार, भूमि स्वामित्व, आवास और वाहनों के मामले में असमानताओं पर भी प्रकाश डाला गया है। इनमें उच्च जातियां आमतौर पर इनके संकेतकों में आगे हैं। भूमि स्वामित्व के मामले में रेड्डी समुदाय सबसे आगे है, जिसके बाद यादव, लंबाडा, मुदिराज, मडिगा और मुन्नूरु कापू समुदायों का स्थान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सामाजिक-आर्थिक स्थिति के संदर्भ में 56 प्रमुख जातियों में महत्वपूर्ण अंतर है। यह देखा गया कि पिछड़ा वर्ग के भीतर कुछ वर्ग अगड़ी जातियों के बराबर हैं, जबकि अजा ईसाई और कमसाली राज्य के औसत पिछड़ेपन सूचकांक की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक उन्नत हैं।
सभी समुदायों में अंतर-जातीय विवाहों के बढ़ते चलन का भी संकेत मिलता है।
सरकार ने रिपोर्ट को अपने आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से जनता के लिए सुलभ बना दिया है और चर्चा एवं फीडबैक आमंत्रित किया है।
श्री प्रभाकर ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य व्यापक विमर्श सुनिश्चित करना है, जिसमें संसद भी शामिल है, खासकर जब वर्तमान सत्र शुरू हो रहा है। केंद्र ने पहले देशव्यापी जाति जनगणना को अव्यावहारिक बताया था, लेकिन अब तेलंगाना की पहल के बाद वह इसे कराने के लिए सहमत हुआ।
इस अवसर पर मंत्री वकीति श्रीहरि, एमएलसी एवं पीसीसी अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ और मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव भी उपस्थित थे।
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