हैदराबाद , अगस्त 30 -- एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों का हवाला देते हुए अल्पसंख्यकों पर संघ के रुख पर सवाल खड़े किये हैं।

श्री ओवैसी ने सोशल मीडिया पर कहा कि संघ का रुख आम जनता और अपने कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा अलग रहा है। उन्होंने संघ के पूर्व प्रमुखों के लेखों का हवाला देते हुए स्वतंत्रता संग्राम और 2002 के गुजरात दंगों के मुद्दे पर आरएसएस की भूमिका की आलोचना की।

'एक्स' पर श्री ओवैसी ने कहा कि श्री भागवत ने कहा है कि जो हिंदू यह मानता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, वह हिंदू नहीं रहेगा। श्री ओवैसी ने हालांकि आरोप लगाया कि संघ ने ऐतिहासिक रूप से जनता के लिए और अपने स्वयंसेवकों के लिए अलग-अलग रुख बनाये रखा है। उन्होंने संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और पूर्व प्रमुख माधव सदाशिवराव गोलवलकर से जुड़े लेखों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि संगठन ने हिंदू-मुस्लिम एकता का विरोध किया था तथा मुसलमानों और ईसाइयों को 'आंतरिक खतरा' बताया था।

श्री ओवैसी ने यह भी आरोप लगाया कि संघ ने स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान नहीं दिया और लोकतंत्र तथा अल्पसंख्यकों पर इसके वैचारिक रुख की आलोचना की।

वर्ष 2002 के गुजरात दंगों का जिक्र करते हुए उन्होंने मुसलमानों की सुरक्षा पर संघ के रिकॉर्ड पर सवाल उठाये और आरोप लगाया कि संगठन की विचारधारा ने अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने में भूमिका निभायी है।

श्री ओवैसी ने श्री भागवत से श्री विनायक दामोदार सावरकर, श्री हेडगेवार और श्री गोलवलकर की रचनाओं के अंशों का सार्वजनिक रूप से पाठ करने का आग्रह किया, ताकि लोग संघ और उसकी विचारधारा के बारे में अपनी राय खुद बना सकें।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित