अंबिकापुर , जुलाई 07 -- झारखंड के धनबाद जिले के वासेपुर का कुख्यात गैंगस्टर एवं दोहरे हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजायाफ्ता फरार अपराधी शब्बीर आलम (60) पिछले लगभग 13 वर्षों से छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में कथित रूप से छद्म पहचान के साथ रहकर परिवहन, एम्बुलेंस और रियल एस्टेट का कारोबार संचालित कर रहा था। झारखंड पुलिस की दबिश के बाद उसके फरार होने के मामले में सरगुजा पुलिस ने उसके सहयोगी एवं कारोबारी साझेदार बैदुल खान के खिलाफ कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज की है।

पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार शब्बीर वर्ष 2013 में उच्च न्यायालय में पेशी के दौरान फरार हो गया था। इसके बाद वह अपने सहयोगी जावेद के साथ अंबिकापुर पहुंचा और स्थानीय बस संचालक बैदुल खान के संपर्क में आया। आरोप है कि बैदुल खान ने उसके भगोड़ा होने की जानकारी होने के बावजूद उसे संरक्षण दिया और परिवहन कारोबार में साझेदारी कराई।

जांच में सामने आया है कि शब्बीर और बैदुल खान मिलकर राजहंस बस सर्विस का संचालन कर रहे थे। इसके अलावा राजहंस कंपनी की दो बसें खरीदकर उन्हें सासाराम और बिहार के पटना मार्ग पर संचालित किया जा रहा था। आरोप है कि गैंगस्टर ने बस व्यवसाय के साथ लगभग 40 से अधिक एम्बुलेंस के संचालन का नेटवर्क भी खड़ा किया और अंबिकापुर में आलीशान मकान का निर्माण कराया।

पुलिस की प्रारंभिक जांच के मुताबिक शब्बीर, उसके सहयोगी जावेद आलम उर्फ बाबू के साथ खरसिया नाका क्षेत्र के आसपास जमीन खरीदकर प्लॉटिंग के कारोबार में भी सक्रिय था। जांच एजेंसियां अब उसके आर्थिक नेटवर्क, संपत्तियों तथा उसे संरक्षण देने वाले लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।

पुलिस के अनुसार शब्बीर, उसके भाई शाहीद आलम तथा पांच अन्य आरोपियों पर 18 अक्टूबर 2001 को धनबाद में डॉन फहीम खान की मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है। इस मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।

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