पटना , फरवरी 05 -- बिहार जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने गुरुवार को कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सुशासन के लिए जाने जाते है और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को प्रदेश की कानून व्यवस्था पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

श्री कुशवाहा ने आज बयान जारी कर कहा कि श्री यादव के माता-पिता के शासनकाल में पूरा प्रदेश भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को विवश था और माताएं-बहनें सत्ता-पोषित अपराधियों के डर से घर की चौखट पार नहीं करती थीं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के शासन में जातीय नरसंहारों से पूरा प्रदेश रक्तरंजित था और अपहरण एवं फिरौती के आतंक के कारण डॉक्टर, इंजीनियर सहित संभ्रांत पेशेवर वर्ग के लोग अपनी जान-माल की सुरक्षा के लिए पलायन करने को मजबूर हो रहे थे। उन्होंने कहा कि सूबे की जनता वह दौर कभी नहीं भूल सकती, जब मुख्यमंत्री आवास में अपहरण की डील और फिरौती की रकम तय होती थी। उन्होंने कहा कि राजद के नेता श्री यादव को कानून व्यवस्था के मुद्दे पर नीतीश सरकार को नसीहत देने से पहले अपने अतीत में झांक लेना चाहिए।

जदयू के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री कुमार के नेतृत्व में वर्ष 2005 से ही राज्य सरकार ने अपराध के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' की नीति को लागू किया है। उन्होंने कहा कि सुशासन की इस नीति के तहत कानून का राज स्थापित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है, जिसमें अपराधी की पहचान या प्रभाव की परवाह किए बिना उसके विरुद्ध त्वरित एवं निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। इसके विपरीत, लालू-राबड़ी के शासनकाल का इतिहास अपराधियों को संरक्षण देने और आपराधिक मामलों की लीपापोती करने का रहा है।

श्री कुशवाहा ने कहा कि श्री कुमार ने बिहार को जंगलराज के काले दौर से निकालकर सुशासन का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसकी सराहना केवल देश में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में होती है। उन्होंने कहा कि श्री यादव बिहार को नकारात्मक राजनीतिक चश्मे से देखते हैं, इसलिए उन्हें राज्य में हुए परिवर्तन दिखाई नहीं दे रहे हैं।

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