कोलकाता , जून 09 -- तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल में आई दरार के 24 घंटे के भीतर ही बागी लोकसभा सांसद दीपक अधिकारी और जून मालिया मंगलवार को कोलाघाट में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल हुए।
दोनों सांसदों के साथ तृणमूल की एक बागी विधायक श्युली साहा भी यहां मौजूद थीं। बैठक में जाने से पहले सुश्री साहा ने पत्रकारों से रहस्यमयी अंदाज में कहा, "बस देखते रहिए कि आगे क्या होता है।" राजनीतिक विश्लेषक तृणमूल के भीतर तेजी से बदल रहे घटनाक्रम के बीच इस बयान को बेहद अहम मान रहे हैं। कोलाघाट में बुलाई गई इस प्रशासनिक बैठक का मुख्य एजेंडा पूरब मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और झाड़ग्राम जिलों के विकास कार्यों की समीक्षा करना था। श्री अधिकारी घाटाल से सांसद हैं, श्री मालिया मेदिनीपुर सीट से लोकसभा सांसद हैं, जबकि सुश्री साहा केशपुर से विधायक हैं। ये सभी क्षेत्र मेदिनीपुर संभाग के अंतर्गत आते हैं।
तृणमूल कांग्रेस के विधायी और संसदीय दल में खुले तौर पर विभाजन के बाद इन बागी नेताओं का इस बैठक में आना काफी मायने रखता है। इससे पहले पार्टी के 58 विधायकों ने नेतृत्व की बात न मानते हुए ऋतब्रत बनर्जी को तृणमूल विधायक दल का नेता चुन लिया था। सोमवार को पार्टी की लोकसभा इकाई की फूट भी तब उजागर हो गई, जब असंतुष्ट सांसदों ने नयी दिल्ली में ताबड़तोड़ बैठकें कीं।
सोमवार को पहली बैठक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई, जिसके बाद शाम को बागी सांसद शताब्दी रॉय के घर पर दूसरी बैठक बुलाई गई। सूत्रों के मुताबिक, इन दोनों ही बैठकों में मुख्यमंत्री मौजूद थे और श्री दीपक भी सोमवार को दिल्ली में ही थे।
राज्य में नयी सरकार के गठन के बाद श्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की थी कि प्रशासनिक समीक्षा बैठकों में विपक्षी सांसदों और विधायकों को भी आमंत्रित किया जाएगा। उनका तर्क था कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर जनप्रतिनिधियों को प्रशासन के साथ मिलकर काम करना चाहिए। मुख्यमंत्री इन बैठकों को दलीय राजनीति से अलग हटकर विकास कार्यों में तेजी लाने वाले एक मंच के रूप में पेश कर रहे हैं।
चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को लगे झटके और पार्टी के भीतर सुलगती बगावत को देखते हुए श्री देव, सुश्री मालिया और सुश्री साहा की इस मौजूदगी के गहरे राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। इससे पहले कल्याणी में हुई प्रशासनिक बैठक में भी ऐसा ही नजारा दिखा था, जहाँ तृणमूल की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार और कई असंतुष्ट विधायक शामिल हुए थे।
सरकारी बैठकों में तृणमूल के असंतुष्ट नेताओं की इस लगातार बढ़ती मौजूदगी से आने वाले दिनों में विपक्षी दल के भीतर एक बड़े दलबदल की सुगबुगाहट तेज हो गयी है।
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