कोलकाता , मई 28 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने गुरुवार को दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कई विधायकों ने विधानसभा चुनावों में पार्टी की करारी हार के बाद दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ गुप्त बैठकें की हैं।

एक बंगाली समाचार चैनल से बात करते हुए श्री भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि 'तृणमूल के कई विधायकों ने दिल्ली में कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की है'। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि तृणमूल कांग्रेस का औपचारिक रूप से कांग्रेस में विलय हो जाना चाहिए।

यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब 15 वर्षों तक सत्तारूढ़ रहने वाली तृणमूल पार्टी एक बड़े चुनावी झटके के बाद अभूतपूर्व आंतरिक संकट से जूझ रही है। चुनावों में भाजपा ने 208 विधानसभा सीटों के साथ भारी बहुमत हासिल किया है, जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल घटकर 80 सीटों पर आ गई है। चुनाव परिणामों के बाद से ही कोलकाता के राजनीतिक हलकों में कांग्रेस और तृणमूल नेतृत्व के बीच संभावित गुप्त बातचीत को लेकर अटकलें तेज हैं।

यद्यपि दोनों दल पारंपरिक रूप से बंगाल की राजनीति में, विशेष रूप से राज्य स्तर पर, कट्टर प्रतिद्वंद्वी रहे हैं, लेकिन हालिया घटनाक्रमों ने एक रणनीतिक नरमी का संकेत दिया है।

राजनीतिक सूत्रों ने संकेत दिया कि बंगाल चुनाव के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी और ममता बनर्जी हाल ही में एक-दूसरे के संपर्क में थे। कथित 'वोट चोरी' और चुनावी अनियमितताओं को लेकर तृणमूल ने राहुल गांधी के अभियान को अपना समर्थन भी दिया है।

इन अटकलों को हवा देते हुए तृणमूल के सूत्रों ने दावा किया कि मालदा जिले के दो अल्पसंख्यक विधायकों ने दिल्ली में कांग्रेस नेताओं के साथ बैठकें की हैं। श्री भट्टाचार्य के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रवक्ता सौम्य ऐच रॉय ने कहा कि कांग्रेस विचारधारा से कभी समझौता नहीं करती।

श्री रॉय ने कहा, "मुझे नहीं पता कि शमिक भट्टाचार्य ने आज क्या कहा है। लेकिन भाजपा अपने विकल्प खुले रखती है क्योंकि बंगाल में उसका कोई जनआधार नहीं है और वह यहाँ अपने संगठन को चलाने के लिए पर्याप्त कार्यकर्ता नहीं ढूंढ पाती है। उन्हें तृणमूल की जरूरत है।"इस बीच, एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने दावा किया कि ममता बनर्जी अपनी 'तानाशाही कार्यशैली' के कारण स्वयं 'इंडिया' गठबंधन के लिए 'सबसे बड़ी बाधा' बन गई थीं। ये घटनाक्रम चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी उथल-पुथल के बीच सामने आए हैं। कई नेताओं और पार्षदों ने खुले तौर पर पार्टी नेतृत्व की आलोचना की है और आरोप लगाया है कि जनता के इस फैसले के लिए संस्थागत भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और अहंकार जिम्मेदार हैं।

बुधवार को पार्टी प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने नगर निगम लेखा समिति के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया, जबकि पार्षद सुशांत घोष ने बोरो चेयरमैन के पद से कदम खींच लिए। एक अन्य पार्टी पदाधिकारी शांतनु ने भी अपनी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया है। नेताओं द्वारा सार्वजनिक रूप से पार्टी के खिलाफ बोलने के साथ ही चुनाव के बाद के इस दौर में तृणमूल कांग्रेस के भीतर दरारें और गहरी होती जा रही हैं।

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