कोलकाता , अगस्त 16 -- पश्चिम बंगाल के पूर्व कृषि मंत्री और विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी रविवार सुबह रामपुरहाट के हत्तालापाड़ा स्थित अपने पैतृक आवास से सटे तृणमूल कांग्रेस कार्यालय के भीतर फांसी के फंदे से लटके मिले।

पुलिस ने एक हस्तलिखित नोट बरामद किया है, जिसमें अत्यधिक राजनीतिक दबाव का जिक्र किया गया है और सार्वजनिक जीवन में आने पर दुख व्यक्त किया गया है।रामपुरहाट से पांच बार विधायक रहे 70 वर्षीय श्री बनर्जी को उनके करीबी सहयोगी ने पार्टी कार्यालय की छत से लटका देखा।

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। कार्यालय को सील कर दिया गया है और वहां पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। बीरभूम के पुलिस अधीक्षक विदित राज भुंदेश ने बताया कि अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज कर लिया गया है और मौके से मिले हस्तलिखित नोट को जांच के लिए भेजा जा रहा है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं।

सुसाइड नोट में श्री बनर्जी ने अपने राजनीतिक करियर का बचाव किया और भ्रष्टाचार में शामिल होने के आरोपों से इनकार किया। नोट की सामग्री के अनुसार, उन्होंने लिखा, "मैं छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहा हूँ। मैं कभी किसी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहा।" उन्होंने यह दावा भी किया कि उन्होंने किसी काम के बदले कभी पैसे नहीं लिये।

रिपोर्टों के अनुसार, नोट में "अत्यधिक राजनीतिक दबाव" का उल्लेख था और परिवार की नयी पीढ़ी के सदस्यों को राजनीति से दूर रहने की सलाह दी गयी थी।

उन्होंने लिखा, "मैं अपनी नयी पीढ़ी के बच्चों को राजनीति में न आने की सलाह देता हूं। उन्हें अपनी-अपनी नौकरियों में ही रहना चाहिए।" श्री बनर्जी ने कथित तौर पर तारापीठ-रामपुरहाट विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल का भी उल्लेख किया और दावा किया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान उन्हें इसके प्रशासनिक निर्णयों से दूर रखा गया था। इन परिस्थितियों ने जिले में सवाल खड़े कर दिए हैं, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि उनके छोटे भाई प्रशांत बनर्जी ने कहा कि पूर्व विधायक ने अपनी मौत से कुछ घंटे पहले तनाव का कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया था।

प्रशांत ने कहा, "मेरे सोने के लिए घर जाने से पहले हम आधी रात तक साथ थे। जब मैं निकला तो वह पूरी तरह सामान्य थे। मुझे समझ नहीं आ रहा कि उसके बाद ऐसा क्या हुआ जिसने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। हम निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं।"पश्चिम बंगाल की नगर विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने इस बात पर सवाल उठाया कि क्या श्री बनर्जी की मौत वास्तव में आत्महत्या ही है? उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि कहीं उनकी हत्या तो नहीं की गयी है। उन्होंने कहा, "सिर्फ एक नोट मिल जाने का मतलब यह नहीं है कि यह आत्महत्या ही थी। इसकी जांच होनी चाहिए। यह भी सच नहीं है कि तृणमूल कांग्रेस में हर कोई भ्रष्ट है। कुछ लोगों ने अपना सिर ऊंचा रखकर राजनीति की है।"श्री बनर्जी ने वर्ष 2001 से 2026 के विधानसभा चुनाव तक लगातार रामपुरहाट का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने कृषि और स्कूली शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया था और 2021 से 2026 के चुनावों तक विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे थे।वह तृणमूल की बीरभूम जिला राजनीति से भी जुड़े रहे थे और पार्टी की जिला कोर कमेटी के अध्यक्ष के रूप में काम कर चुके थे। उन्हें 2026 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल ने फिर से मैदान में उतारा था, लेकिन वे भाजपा के ध्रुव साहा से 24,000 से अधिक वोटों से हार गये थे। वर्ष 2022 में रामपुरहाट के बोगटुई नरसंहार के बाद भी उन्हें राजनीतिक जांच का सामना करना पड़ा था।

उनकी मौत से तमाम राजनीतिक दलों के लोग शोक में डूब गये हैं। श्री साहा ने श्री बनर्जी की मौत की परिस्थितियों की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने कहा कि किसी भी गलती से पहले लोगों को बदनाम करने, चरित्र हनन करने और सामाजिक रूप से अपमानित करने की भाजपा की प्रवृत्ति के कारण यह स्थिति पैदा हुई है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित