कोलकाता , जुलाई 14 -- तृणमूल कांग्रेस में विभाजन से पारंपरिक कार्यक्रम की अनिश्चितता से आगामी 21 जुलाई 'शहीद दिवस' के राजनीतिक समीकरणों के नाटकीय मोड़ लिए जाने के बीच पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने शहीद मीनार पर बड़ी रैली के जरिए इस दिन पर अपना पुराना दावा मजबूत करने की तैयारियां तेज कर दी हैं।
तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी विभाजन के बीच श्री ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले 'नव्य तृणमूल' गुट ने एस्प्लेनेड में गांधी प्रतिमा के समक्ष सभा करने की अनुमति मांगी है। वहीं पार्टी के ममता बनर्जी-अभिषेक बनर्जी गुट को वार्षिक शहीद दिवस कार्यक्रम के लिए अभी तक किसी भी स्थान की अनुमति नहीं मिली है।
इसके विपरीत पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी को 21 जुलाई को शहीद मीनार में अपना कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति पहले ही मिल चुकी है।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार प्रदेश इकाई रैली को संबोधित करने के लिए नयी दिल्ली से एक वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता को बुलाने की योजना बना रही है, हालांकि अभी उस नेता के नाम की घोषणा नहीं की गयी है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने मंगलवार दोपहर शहीद मीनार मैदान का दौरा कर स्थल का निरीक्षण किया और 21 जुलाई को प्रस्तावित पार्टी के 'शहीद मीनार चलो' कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने ने कहा कि इस रैली में कोलकाता के साथ-साथ राज्य के सभी जिलों से कांग्रेस कार्यकर्ता, युवा कांग्रेस सदस्य और महिला कांग्रेस कार्यकर्ता हिस्सा लेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि कार्यक्रम में भारी भीड़ जुटेगी और उन्होंने बताया कि जनसभा को संबोधित करने के लिए दिल्ली से दिग्गज कांग्रेस नेता को लाने के प्रयास जारी हैं।
कांग्रेस ने यह भी घोषणा की है कि कार्यक्रम के दौरान उसकी प्रमुख मांगों में से एक 'मनीष गुप्ता फाइल' सार्वजनिक करना होगी। पार्टी ने 21 जुलाई, 1993 को हुए पुलिस गोलीकांड की घटनाओं में संदिग्ध भूमिका को लेकर राज्य के पूर्व गृह सचिव मनीष गुप्ता को निशाने पर लिया है, जो अब तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं।
यह आयोजन 21 जुलाई, 1993 को राइटर्स बिल्डिंग्स की ओर मार्च के दौरान पुलिस गोलीबारी में मारे गये 13 युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की याद में मनाया जाता है, जब राज्य में तत्कालीन वाममोर्चा की सरकार थी। यह घटना पश्चिम बंगाल के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाओं में से एक रही है।
तृणमूल कांग्रेस की स्थापना के बाद सुश्री बनर्जी ने इस दिन को पार्टी के सबसे बड़े वार्षिक राजनीतिक कार्यक्रम में बदल दिया था और 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता परिवर्तन होने तक हर वर्ष एस्प्लेनेड में विशाल रैलियां आयोजित की गयीं। अब चूंकि तृणमूल कांग्रेस विभाजित हो चुकी है और सत्ता से बाहर है, इसलिए कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यह स्थिति 1993 के आंदोलन की विरासत पर फिर से अपना अधिकार जताने का मौका है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस वर्ष के 21 जुलाई के कार्यक्रम पश्चिम बंगाल के बदलते राजनीतिक परिदृश्य को प्रदर्शित करेंगे, जहां प्रतिद्वंद्वी दल शहीद दिवस के आयोजन की विरासत को नयै सिरे से परिभाषित करने की कोशिश कर रहे हैं।
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