अलवर , जुलाई 15 -- राजस्थान में अलवर जिले के सरिस्का बाघ अभयारण्य से निकलकर एक बार फिर बाघ आबादी क्षेत्र में पहुंच गया।

बुधवार दोपहर अलवर-नारायणपुर रोड स्थित ताल वृक्ष के पास तुलसीवाला गांव में एक बाघ दिखाई देने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने गांव के रास्ते पर बाघ को घूमते देखा, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्रित हो गये। सूचना मिलते ही सरिस्का प्रशासन का राहत दल, वन विभाग के अधिकारी और नारायणपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंच गयी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव में आया बाघ बाघिन एसटी-12 का शावक बताया जा रहा है। एसटी-12 के चार शावक हैं, जिनमें दो नर और दो मादा शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से एक शावक पिछले कई दिनों से लापता है और वन विभाग का दल उसकी लगातार तलाश कर रहा है। आशंका जतायी जा रही है कि गांव में दिखाई दिया बाघ वही शावक हो सकता है।

ग्रामीणों के अनुसार, बाघ गांव के रास्ते पर दिखायी दिया था। लोगों ने सावधानी बरतते हुए उसे खेतों की ओर मोड़ दिया, जिसके बाद वह एक खेत में जाकर बैठ गया। बाघ के खेत में मौजूद रहने से पूरे गांव में भय का माहौल बना रहा और लोगों ने घरों से बाहर निकलना बंद कर दिया।

ग्रामीणों ने वन अधिकारियों से मांग की कि बाघ को बेहोश करके सुरक्षित तरीके से सरिस्का के जंगल में छोड़ा जाए। उनका कहना है कि यह पहली बार नहीं है, इससे पहले भी कई बार बाघ गांव की सीमा तक पहुंच चुके हैं। कुछ दिन पहले इसी क्षेत्र में एक बाघ ने चार भैंसों का शिकार भी किया था।

वन विभाग के अधिकारियों का हालांकि कहना है कि बाघ खुद जंगल की ओर लौट जाता है तो उसे बेहोश करने की आवश्यकता नहीं होगी। अधिकारियों के अनुसार, शावक की उम्र को देखते हुए फिलहाल उसे बेहोश करने का निर्णय नहीं लिया जा सकता। इसी बात को लेकर कई घंटों तक ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच सहमति नहीं बन सकी।

बाघ को तुरंत नहीं हटाये जाने से नाराज ग्रामीणों ने तुलसीवाला स्टैंड पर कुछ समय के लिए सड़क पर यातायात अवरुद्ध कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को समझाकर रास्ता खुलवाया।

थाना प्रभारी रोहताश ने बताया कि बाघ के गांव में आने की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग का दल मौके पर पहुंच गया था। क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाये रखी गयी है और ग्रामीणों से सतर्क रहने को कहा गया है। वन विभाग का दल लगातार बाघ की गतिविधियों पर नजर बनाये हुए है। अधिकारियों का प्रयास है कि बाघ को सुरक्षित तरीके से वापस जंगल की ओर भेजा जाये। इसके लिए विशेषज्ञों और कर्मचारियों का दल मौके पर तैनात किया गया है।

उधर, बाघ आने की खबर फैलते ही आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचने लगे। वन विभाग और प्रशासन ने लोगों से भीड़ नहीं लगाने, खेतों और जंगल की ओर अकेले नहीं जाने और बच्चों और पशुओं को सुरक्षित रखने का आग्रह किया।

वन अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और बाघ किसी पर हमला किये बिना झाड़ियों और खेत में बैठा हुआ देखा गया है। विभाग पूरी सतर्कता के साथ निगरानी कर रहा है, ताकि किसी प्रकार की जनहानि या वन्यजीव को नुकसान न हो। उल्लेखनीय है कि करीब दो वर्ष पहले भी सरिस्का का एक बाघ जंगल से निकलकर बानसूर, मुंडावर, कोटकासिम, भिवाड़ी और हरियाणा के धारूहेड़ा से लेकर रेवाड़ी तक पहुंच गया था। उस दौरान बाघ के हमले में दो किसान घायल हुए थे। करीब एक महीने तक वह हरियाणा के बावल क्षेत्र के झाबुआ गांव के पास जंगल में डेरा डाले रहा और बाद में उसी रास्ते से वापस सरिस्का लौट आया था। तब वन विभाग ने राहत की सांस ली थी।

फिलहाल तुलसीवाला गांव में बाघ की मौजूदगी ने एक बार फिर सरिस्का के बफर क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन और वन विभाग के दल पूरी तरह चौकस हैं और पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाये हुए हैं।

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