नयी दिल्ली , जून 16 -- ड्रोन तकनीक के बढ़ते उपयोग के बीच एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले तीन साल में लॉजिस्टिक्स, आंतरिक सुरक्षा और क्लीनटेक जैसे क्षेत्रों में इसके इस्तेमाल में 55 प्रतिशत की वृद्धि होगी।
नेक्सजेन एग्जीबिशन्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किये गये इस सर्वेक्षण के अनुसार, ड्रोन अब केवल निगरानी उपकरण नहीं रहे, बल्कि आधुनिक सप्लाई चेन, हरित विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्वपूर्ण साधन बन चुके हैं।
अड़तीस प्रतिशत प्रतिभागियों ने सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स आवश्यकताओं को ड्रोन अपनाने का सबसे बड़ा कारण बताया, जबकि 27 प्रतिशत ने तेज और टिकाऊ डिलीवरी समाधान की बढ़ती मांग को प्रमुख कारक माना। वहीं, 54 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि वर्तमान उद्योग रुझान आने वाले वर्षों में ड्रोन उपयोग को और अधिक गति देंगे।
दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु और पुणे के एक हजार उद्योग विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, सुरक्षा अधिकारियों और तकनीकी पेशेवरों के बीच इस सर्वेक्षण में 40 प्रतिशत प्रतिभागियों ने सरकारी नीतियों को ड्रोन उद्योग के विकास का प्रमुख आधार बताया, जबकि 21 प्रतिशत ने तकनीकी नवाचार को सबसे बड़ा प्रेरक माना।
क्लीनटेक क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग उत्सर्जन कम करने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और पर्यावरण-अनुकूल संचालन को बढ़ावा देने में तेजी से बढ़ रहा है। वहीं, सीमा सुरक्षा, निगरानी और महत्वपूर्ण सुरक्षा अभियानों में भी ड्रोन की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
नेक्सजेन एग्जीबिशन्स की प्रबंध निदेशक संगीता बंसल ने कहा, "ड्रोन तकनीक भारत के लॉजिस्टिक्स, सुरक्षा और सतत विकास के भविष्य को नयी दिशा दे रही है। अगले कुछ वर्षों में ड्रोन देश की आपूर्ति श्रृंखला को अधिक कुशल, पर्यावरण-अनुकूल और सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।"सर्वेक्षण में उद्योग के समक्ष चुनौतियों की बात भी सामने आयी है। एक-तिहाई प्रतिभागियों ने नियामकीय प्रतिबंधों को सबसे बड़ी बाधा बताया, जबकि 26 प्रतिशत ने उच्च परिचालन लागत, 21 प्रतिशत ने प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी और 15 प्रतिशत ने गोपनीयता एवं सुरक्षा संबंधी चिंताओं को प्रमुख चुनौती माना।
इसके बावजूद उद्योग का भरोसा मजबूत बना हुआ है। बयालिस प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि ड्रोन का बढ़ता उपयोग अगले तीन साल में देश के लॉजिस्टिक्स, आंतरिक सुरक्षा और क्लीनटेक बुनियादी ढांचे को उल्लेखनीय रूप से सशक्त करेगा।
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