कानपुर , अक्टूबर 08 -- उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) के औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्ट्री पंजीकरण पिछले तीन वर्षों में दोगुने से अधिक हो गए हैं। वर्ष 2022-23 में करीब 1,400 पंजीकरण की तुलना में 2025-26 में यह संख्या बढ़कर लगभग 3,300 हो गई।
औद्योगिक गतिविधियों से अब तक 50,000 से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। यह वृद्धि प्रदेश में विनिर्माण गतिविधियों के विस्तार और तैयार औद्योगिक बुनियादी ढांचे की बढ़ती मांग को दर्शाती है, यह जानकारी यूपीसीडा की एसीईओ दीक्षा जैन ने दी।
यूपीसीडा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से आगे बढ़ते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड में अपनी औद्योगिक मौजूदगी मजबूत कर रहा है। गोरखपुर, संत कबीर नगर और ललितपुर में औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। ललितपुर में एक समर्पित फार्मास्युटिकल पार्क भी विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा, यूपीसीडा बोर्ड ने एक्सप्रेसवे और प्रमुख राजमार्गों के आसपास रणनीतिक रूप से करीब पांच नए औद्योगिक क्षेत्रों को मंजूरी दी है, जिससे उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके।
इस विस्तार को प्रदेश में 55,000 एकड़ से अधिक के औद्योगिक लैंड बैंक का समर्थन प्राप्त है। इसमें करीब 2,000 एकड़ विकसित भूमि वर्तमान में औद्योगिक उपयोग के लिए उपलब्ध है। नए औद्योगिक क्षेत्रों के साथ पुराने औद्योगिक एस्टेट में भी सड़क, जल निकासी और अन्य जरूरी सुविधाओं को बेहतर किया जा रहा है।
सुश्री जैन ने कहा, "उद्योगों के लिए केवल जमीन पर्याप्त नहीं है। उन्हें भरोसेमंद बुनियादी ढांचा, बेहतर कनेक्टिविटी और अनुकूल औद्योगिक इकोसिस्टम चाहिए। हमारा फोकस प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ भूमि आवंटन और स्वीकृति प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाना है।"यूपीसीडा अब सेक्टर-विशिष्ट औद्योगिक विकास पर भी जोर दे रहा है। ललितपुर फार्मा पार्क में विशेषीकृत बुनियादी ढांचा विकसित किया जा रहा है, ताकि बड़ी फार्मा कंपनियों को आकर्षित कर समर्पित विनिर्माण इकोसिस्टम तैयार किया जा सके।
पीलीभीत के भरा पचपेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में ऑटो और ऑटो-कंपोनेंट उद्योग की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह क्षेत्र पंतनगर के सिडकल औद्योगिक क्षेत्र के निकट है, जहां प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माता और उनके सप्लायर मौजूद हैं। यूपीसीडा इस भौगोलिक निकटता का लाभ उठाकर ऑटो-कंपोनेंट और विनिर्माण निवेश आकर्षित करने की दिशा में काम कर रहा है।
फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए बहेड़ी फूड पार्क विकसित किया जा रहा है, जबकि लखीमपुर खीरी के कुंभी में बायोप्लास्टिक पार्क स्थापित किया जा रहा है।
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