इंफाल , अक्टूबर 25 -- मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने कांगपोकपी जिले के सिनाई शिविर का दौरा किया, जो सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (एसओएस) समझौते के तहत आने वाला एक कुकी उग्रवादी शिविर है।
राज्य सरकार के अनुसार किसी मौजूदा मुख्यमंत्री द्वारा किसी निर्धारित एसओएस शिविर का किया गया यह पहला दौरा है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की कोबरा यूनिट, मणिपुर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों द्वारा चलाए गए इस अभियान के बाद शिविर से हथियार हटा दिए गए और इसे सीआरपीएफ ने अपने नियंत्रण में ले लिया। इस घटना ने एसओएस समझौते की जांच को और तेज कर दिया है, जबकि इस समझौते को रद्द करने की मांगें भी लगातार बढ़ रही हैं। सिनाई कैंप को कुकी नेशनल आर्मी (केएनए) और कुकी लिबरेशन आर्मी (केएलए) के सदस्यों के लिए निर्धारित किया गया था, ये दोनों ही समूह एसओएस समझौते के दायरे में आते हैं।
सरकार के प्रवक्ता और विधायक थी राधेश्याम के साथ पहुंचे मुख्यमंत्री ने शिविर परिसर का निरीक्षण किया। उन्होंने सीआरपीएफ और असम राइफल्स के अधिकारियों से इस अभियान और इलाके की मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति के बारे में जानकारी ली। श्री खेमचंद सिंह ने वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों और जवानों से बातचीत करते हुए इस अभियान में सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन की भूमिका की सराहना की। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि तलाशी और जांच अभियानों के दौरान आम नागरिकों को कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने राज्य में शांति और स्थिरता बहाल करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि जब तक 'बंदूक संस्कृति' (गन कल्चर) बनी रहेगी, तब तक मणिपुर न तो तरक्की कर सकता है और न ही वहां स्थायी शांति आ सकती है। उन्होंने राज्य के लोगों से हिंसा का त्याग करने, अवैध हथियार सौंपने और शांति तथा सद्भाव बहाल करने के लिए मिलकर काम करने की अपील की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने इलाके के सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों से भी बातचीत की।
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