खरगोन , जुलाई 18 -- मध्य प्रदेश के खरगोन, शहडोल और श्योपुर जिलों में कथित तौर पर अलग-अलग नाम, पैन और आधार नंबर के जरिए एक साथ संविदा चिकित्सा अधिकारी के रूप में कार्य करने वाले चिकित्सक की सेवाएं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने समाप्त कर दी हैं। मामले में फर्जी दस्तावेजों के उपयोग, पहचान बदलकर नौकरी हासिल करने और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की जांच जारी है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. डीएस चौहान ने शनिवार को बताया कि एनएचएम की मिशन संचालक डॉ. सलोनी सिडाना के आदेश पर संविदा चिकित्सक डॉ. महेश चंद्र शर्मा की सेवाएं समाप्त की गई हैं।

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी ने विभाग को कथित रूप से गुमराह करते हुए अलग-अलग नाम, पैन और आधार नंबर का उपयोग कर तीन जिलों में समानांतर रूप से संविदा चिकित्सा अधिकारी के पद पर कार्य किया। हालांकि तीनों नियुक्तियों में एक ही मेडिकल काउंसिल पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) नंबर का उपयोग किया गया।

जांच के अनुसार आरोपी जून 2021 से श्योपुर जिले के सहसराम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉ. महेश चंद्र शर्मा, फरवरी 2023 से खरगोन जिले के केली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉ. महेश कुमार तथा फरवरी 2024 से शहडोल जिले के ऊफरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉ. महेश चंद्रा के नाम से पदस्थ था।

विभाग के अनुसार आरोपी ने कथित रूप से अनुचित लाभ प्राप्त कर सरकारी धन का आहरण किया, जो भारतीय न्याय संहिता के तहत धोखाधड़ी, कूटरचना और जालसाजी से संबंधित प्रावधानों के दायरे में आता है। यह कृत्य एनएचएम के नियमों का भी गंभीर उल्लंघन माना गया है।

तीनों जिलों के सीएमएचओ की ओर से आरोपी को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे लेकिन उसने कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया। इसके बाद उसकी संविदा सेवाएं समाप्त कर दी गईं।

मामले में एनएचएम की ओर से भोपाल के चुनाभट्टी थाने में भी प्रकरण दर्ज कराया गया है। वहीं शहडोल जिले के जयसिंहनगर थाने में राजस्थान निवासी एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराते हुए दावा किया है कि वह वास्तविक डॉ. महेश चंद्र शर्मा है तथा उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसके चाचा सतीश शर्मा द्वारा मध्य प्रदेश के तीन जिलों में नौकरी प्राप्त की गई। उसने बताया कि सतीश शर्मा राजस्थान के भरतपुर का निवासी है और घटनाक्रम सामने आने पर उसने शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत की जांच की जा रही है।

यह मामला तीन जुलाई को उस समय सामने आया था, जब रीवा लोकायुक्त की टीम ने आरोपी को शहडोल में कथित रूप से 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। जांच के दौरान उसके श्योपुर और खरगोन में भी पदस्थ होने का खुलासा हुआ।

सीएमएचओ डॉ. चौहान ने बताया कि स्थानीय जांच रिपोर्ट तथा आरोपी को दिए गए मानदेय का पूरा विवरण उच्च कार्यालय को भेज दिया गया है। मामले की राज्य स्तर पर तथा संबंधित जिलों में जांच जारी है।

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