कोल्हापुर/सिंधुदुर्ग , जुलाई 31 -- महाराष्ट्र के मत्स्य पालन और बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे ने कहा है कि पुणे में तिलक परिवार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इस साल का लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करने के लिए बहुत सोच-समझकर आमंत्रित किया है।
श्री राणे ने आज सिंधुदुर्ग में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुणे में श्री अमित शाह के दौरे का विरोध करने वाले शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मुझे सांसद संजय राउत की राजनीतिक स्थिति पर तरस आता है, जिन्होंने श्री शाह के पुणे दौरे की आलोचना की।" उन्होंने यह भी तंज कसा कि एक "खत्म हो चुकी पार्टी" के नेताओं को देश के गृह मंत्री के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि तिलक परिवार ने यह फैसला बहुत सोच-समझकर लिया है। इसलिए श्री राउत को अपनी राजनीतिक साख जानने के बाद ही कोई टिप्पणी करनी चाहिए।
गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के तौर पर एक अगस्त को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक पुरस्कार प्रदान करेंगे।
उन्होंने जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर कांग्रेस द्वारा अमित शाह के दौरे का विरोध करने के सवाल पर स्पष्ट किया कि वहां कानून-व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ को काबू में करने के लिए जरूरी कदम उठाए गए थे।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को पहले अपने कार्यकाल के दौरान पेपर लीक और लाठीचार्ज के इतिहास पर गौर करना चाहिए।
श्री राणे ने कॉक्ररोज जनता पार्टी (सीजेपी) नेता अभिजीत दिपके को मिल रही धमकियों के आरोपों पर बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के राज्य में सभी की सुरक्षा के लिए पुलिस और राज्य सरकार जिम्मेदार है।
उन्होंने कहा कि मीडिया के सामने बोलने के बजाय दिपके को पुलिस स्टेशन जाकर सबूतों के साथ शिकायत दर्ज करानी चाहिए, साथ ही उन्होंने कहा कि पुलिस संबंधित लोगों के खिलाफ निश्चित रूप से सख्त कार्रवाई करेगी।
उन्होंने वरिष्ठ नागरिक सेवक तुकाराम मुंडे के काम करने के तरीके के बारे में पूछे जाने पर कहा कि मुंडे कानूनों और सरकारी फैसलों को सख्ती से लागू कर रहे हैं।
उन्होंने कहा "राज्य में उनके जैसे कई अधिकारी हैं जो नियमों के अनुसार काम करते हैं, और प्रशासन से इसी तरह के अनुशासित काम की उम्मीद की जाती है।" उन्होंने कहा कि ऐसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों की वजह से ही आज महाराष्ट्र को एक प्रगतिशील राज्य के तौर पर पहचान मिली है।
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