तिरुवनंतपुरम , फरवरी 27 -- वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि केरल सरकार ने चुनावी उद्देश्य से एक करोड़ से अधिक नागरिकों का व्यक्तिगत डेटा अवैध रूप से एकत्र कर साझा किया है। उन्होंने ये आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के इस्तीफे की मांग की।

श्री चेन्निथला ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि पहले सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के निजी विवरण लीक किए गए और अब राज्य की 'वुमेन्स सेफ्टी स्कीम' में पंजीकृत लाखों महिलाओं का व्यक्तिगत डेटा भी साझा किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की सीधी भूमिका रही।

उन्होंने सीएमओ में तैनात विशेष कर्तव्य अधिकारी (ओएसडी) सीरम संबाशिव राव द्वारा जारी कथित पत्रों की प्रतियां जारी कीं। उन्होंने 7 फरवरी के एक पत्र का हवाला देते हुए कहा कि योजना के तहत पंजीकृत 35 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं के व्यक्तिगत विवरण तक पहुंच बनाकर उन्हें जारी किया गया।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा सत्यापित डेटा जिसमें नाम, मोबाइल नंबर, आयु, लिंग, जिला, तालुक, वार्ड और स्थानीय निकाय से जुड़ी जानकारी शामिल है, लगभग 8 लाख राज्य कर्मचारियों, 72 लाख कल्याण पेंशनरों, 3 लाख लघु उद्यमियों और महिला सुरक्षा योजना की लाभार्थियों का निजी एजेंसियों को बिना किसी सुरक्षा प्रावधान के सौंपा गया। इसे उन्होंने "गंभीर आपराधिक कृत्य" बताते हुए व्यापक जांच की मांग की।

श्री चेन्निथला ने यह भी दावा किया कि 19 से 21 फरवरी के बीच मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े एक बिजनेस व्हाट्सएप अकाउंट से करीब एक करोड़ संदेश भेजे गए, जिनमें कथित तौर पर सरकारी डेटाबेस से प्राप्त जानकारी का उपयोग किया गया। उनके अनुसार यह कार्रवाई अनधिकृत और अवैध थी।

उन्होंने के-स्मार्ट को संबोधित एक अन्य पत्र का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि स्थानीय स्वशासन सेवाओं से संबंधित सरकारी सत्यापित डेटा वाले के-स्मार्ट डेटाबेस को 12 फरवरी तक मिशन निदेशक को सौंपने का निर्देश दिया गया था। साथ ही, आईटी मिशन के एक संविदा कर्मचारी को डेटा हस्तांतरण पर भी सवाल उठाए।

श्री चेन्निथला ने 11 फरवरी 2026 के सरकारी आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि आईटी विभाग की गतिविधियों के विस्तार के लिए करीब दस निजी एजेंसियों को सूचीबद्ध किया गया, जबकि चुनाव निकट हैं। उन्होंने आदेश की तात्कालिकता पर भी सवाल उठाया।

उन्होंने 2020-21 के स्प्रिंकलर विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि यह मामला उस समय की तरह है, जब कोविड-19 महामारी के दौरान नागरिकों का स्वास्थ्य डेटा एक अमेरिकी कंपनी के साथ साझा करने का प्रयास हुआ था।

कांग्रेस नेता ने उच्चतम न्यायालय के 2017 के ऐतिहासिक फैसले न्यायमूर्ति के.एस. पुट्टास्वामी (सेवानिवृत्त) बनाम भारत संघ का हवाला देते हुए कहा कि बिना सहमति व्यक्तिगत डेटा का संग्रह और उपयोग अनुच्छेद 21 के तहत निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रावधानों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया।

श्री चेन्निथला ने कहा कि संवेदनशील डेटा के अनधिकृत उपयोग से नागरिक साइबर धोखाधड़ी और अन्य अपराधों के जोखिम में आ सकते हैं।

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