कोच्चि , सितंबर 20 -- आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर के लिए अकाउंटिंग मैन्युअल बनाने के बाद भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान (आईसीएआई) सभी बड़े मंदिरों के लिए एक आम फ्रेमवर्क बनाने पर काम शुरू करेगा।

आईसीएआई के अध्यक्ष प्रसन्ना कुमार डी. ने यहां मीडिया के लिए 19-20 सितंबर को आयोजित एक कार्यशाला में कहा कि तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् के लिए अकाउंटिंग मैन्युअल बनाने का जिम्मा संस्थान को दिया गया है। यह काम 100 दिन में पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद देश के दूसरे बड़े मंदिरों के लिए भी एक आम फ्रेमवर्क बनाने की योजना है।

यह पूछे जाने पर कि क्या अयोध्या के राम मंदिर के लिए इसी तरह का मैन्युअल बनाने की योजना है, श्री कुमार ने कहा कि अब तक ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं मिला है।

अकाउंटिंग मैन्युअल में इस बात का उल्लेख होता है कि लेखा बही किस तरह रखना है, इसमें किन मानकों का पालन करना है। तिरुपति मंदिर के लिए यह उसकी जरूरतों के हिसाब से होगा।

आईसीएआई की केंद्रीय परिषद के सदस्य संजीव कुमार सिंघल ने रविवार को एक सत्र को संबोधित करते हुए बताया कि इसके अलावा संस्थान ने तिरुपति देवस्थानम् को उनकी अचल संपत्ति और उनके पास पड़े सोने के वैल्यूएशन का भी ऑफर दिया है। उन्होंने बताया कि वैल्यूएशन के बाद यदि मंदिर प्रशासन अपनी संपत्ति का इस्तेमाल किराये के लिए या दूसरे कामों में करना चाहता है, तो इसमें उसे आसानी होगी।

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