अमरोहा , सितंबर 22 -- करीब आठ दशक बाद उत्तरी भारत के तिगरी और गढ़मुक्तेश्वर के ऐतिहासिक गंगा मेलों को पैंटून पुल से जोड़ने की मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद जगी उम्मीदों के बीच अब परियोजना की वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
अगस्त में हापुड़ और अमरोहा के प्रशासन ने करीब 700 मीटर लंबे पुल की योजना सामने रखी थी और इसे मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना से जोड़ा गया था। हालांकि सितंबर के उत्तरार्ध तक पुल का निर्माण शुरू होना तो दूर, इसकी अंतिम स्वीकृति और निर्माण की स्पष्ट समय-सारिणी भी सार्वजनिक नहीं हुई है।
हाल ही में तिगरी गंगा मेला क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त संगीता सिंह की मौजूदगी में जिलाधिकारी डॉ. नितिन गौड़ ने पैंटून पुल के संबंध में बताया कि प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है और अनुमति मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जिला सूचना कार्यालय की ओर से जारी निरीक्षण संबंधी जानकारी में पुल के निर्माण की स्वीकृति मिलने, बजट जारी होने अथवा निर्माण की तारीख तय होने की कोई जानकारी नहीं दी गई है।
अगस्त में सामने आई योजना के अनुसार दोनों मेलों के बीच करीब 700 मीटर लंबा पैंटून पुल प्रस्तावित था। इसमें करीब 250 पीपों के इस्तेमाल और 10 से 12 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत की बात सामने आई थी। उस समय अक्टूबर में पुल लगाए जाने की संभावना जताई गई थी। हालांकि संबंधित विभागीय अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया था कि प्रयागराज से पीपों की उपलब्धता और शासन स्तर से आदेश की प्रक्रिया में समय लग सकता है।
इसके विपरीत, 10 सितंबर को तिगरी मेले की अन्य व्यवस्थाओं के लिए शासन से 5.56 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है। इस राशि से प्रकाश, सफाई, शौचालय, कूड़ा उठान, टेंट, पार्किंग, स्टॉल, सौंदर्यीकरण और घाटों से संबंधित व्यवस्थाएं की जानी हैं। सामान्य मेला व्यवस्थाओं के लिए धन स्वीकृत हो चुका है, जबकि दोनों गंगा तटों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण परियोजना के संबंध में अभी शासन की अनुमति का इंतजार बताया जा रहा है।
यदि पुल इसी वर्ष कार्तिक पूर्णिमा मेले के लिए प्रस्तावित है तो तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति, निर्माण एजेंसी का निर्धारण, पीपों की उपलब्धता, नदी में एंकरिंग तथा सुरक्षा परीक्षण समेत पूरी प्रक्रिया मुख्य स्नान से पहले पूरी करनी होगी। अगस्त में विभागीय स्तर पर पुल निर्माण की संभावना को लेकर उत्साह के साथ व्यावहारिक कठिनाइयों की बात भी सामने आई थी।
दिलचस्प यह भी है कि 22 सितंबर की एक ताजा रिपोर्ट में मेले की व्यवस्थाओं के साथ दोनों मेलों को जोड़ने के लिए पैंटून पुल की व्यवस्था किए जाने की बात कही गई है, जबकि 20 सितंबर के मंडलायुक्त निरीक्षण की प्रकाशित जानकारी में जिलाधिकारी के हवाले से केवल प्रस्ताव शासन को भेजे जाने और अनुमति के बाद कार्रवाई की बात दर्ज है।
ऐसे में फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि पुल योजना समाप्त हो गई है या इस वर्ष इसका निर्माण नहीं होगा। हालांकि सवाल यह जरूर है कि यदि पैंटून पुल मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी परियोजना का हिस्सा है तो सितंबर के अंतिम सप्ताह तक इसकी स्वीकृति, बजट और निर्माण कार्यक्रम सार्वजनिक रूप से स्पष्ट क्यों नहीं है। तिगरी और गढ़मुक्तेश्वर के मेलों को जोड़ने वाला यह पुल केवल आवागमन की सुविधा नहीं, बल्कि दोनों गंगा तटों के धार्मिक, सामाजिक और कारोबारी संपर्क को मजबूत करने की योजना के रूप में देखा गया था। दिल्ली, हरियाणा तथा राजस्थान समेत विभिन्न राज्यों से करीब 35 से 40 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने वाले मेले में इसकी उपयोगिता को देखते हुए अब जिला प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि प्रस्तावित पैंटून पुल इस वर्ष वास्तव में धरातल पर उतर पाएगा या नहीं।
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