बिलासपुर , अप्रैल 28 -- छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मस्तूरी जनपद पंचायत के ग्राम चौहा में पानी की समस्या अब गंभीर हो गई है। परेशान ग्रामीण कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचे और गंगा मछवारा समिति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप है कि समिति मछली पालन के लिए बांधा तालाब को बार-बार तोड़ रही है, जिससे तालाब में पानी टिक नहीं पा रहा और पूरे गांव में जल संकट बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि यह बांधा तालाब साल 2009-10 में शासन द्वारा करीब 2 करोड़ 65 लाख रुपये की लागत से बनाया गया था। इसके निर्माण के दौरान चौहा और टिकारी गांव के कई किसानों ने अपनी जमीन दी थी, जिसके बदले उन्हें मुआवजा भी मिला था। तालाब बनने के बाद इलाके का जलस्तर ठीक हो गया था और गांव के कुएं व हैंडपंप सालभर पानी से भरे रहते थे।
लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब से गंगा मछवारा समिति को तालाब का पट्टा मिला है, तब से तालाब की स्थिति खराब होती जा रही है। मछली पालन के नाम पर तालाब को बार-बार तोड़ा जाता है, जिससे पानी रुक नहीं पाता और धीरे-धीरे तालाब सूखने लगता है।
इसका सीधा असर गांव के जल स्रोतों पर पड़ा है। गर्मी आते ही हैंडपंप और कुएं सूखने लगे हैं, जिससे लोगों को पीने के पानी के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पहले तालाब का रकबा करीब 100 एकड़ था, जो अब घटकर लगभग 51 एकड़ रह गया है। इस मामले में साल 2023-24 में एसडीएम मस्तूरी को सीमांकन के लिए शिकायत दी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कई जगहों पर पुराने जमीन मालिकों का कब्जा भी बना हुआ है, जिससे तालाब की सीमा और सिमटती जा रही है।
ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि इस पूरे मामले की जल्द जांच कराई जाए, तालाब का सही सीमांकन किया जाए, अतिक्रमण हटाया जाए और मछली पालन के नाम पर हो रही छेड़छाड़ पर रोक लगाई जाए।
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