मुरादाबाद , जून 24 -- उत्तर प्रदेश में तालाबों से बेदखली की कार्रवाई के विरोध में बुधवार को सिंघाड़िया समाज के लोगों ने मुरादाबाद कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि तालाबों पर उनके पारंपरिक अधिकार समाप्त किए जाने से प्रदेश के करीब 12 लाख लोगों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। सिंघाड़िया समाज के बैनर तले बड़ी संख्या में एकत्र हुए लोगों ने आरोप लगाया कि राजस्व विभाग की हालिया कार्रवाइयों के कारण पीढ़ियों से सिंघाड़े की खेती कर जीवनयापन करने वाले परिवारों को तालाबों से बेदखल किया जा रहा है। इससे समाज के सामने आर्थिक और रोजगार का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका समाज वर्षों से तालाबों में सिंघाड़े की खेती करता आ रहा है और यह उनका पुश्तैनी व्यवसाय है। समाज के प्रतिनिधियों ने दावा किया कि वर्ष 1359 फसली से राजस्व अभिलेखों में उनके अधिकार दर्ज हैं और इन्हीं के आधार पर वे तालाबों का उपयोग करते रहे हैं। उनका कहना है कि उनके पूर्वजों ने जल स्रोतों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

सिंघाड़िया समाज के नेताओं ने आरोप लगाया कि राजस्व विभाग ऐतिहासिक तालाबों को केवल सरकारी संपत्ति मानकर बेदखली की कार्रवाई कर रहा है, जो उनके अनुसार अन्यायपूर्ण और असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रदत्त जीवन और आजीविका के अधिकार तथा अनुच्छेद-46 के तहत पिछड़े वर्गों के संरक्षण संबंधी प्रावधानों के विपरीत है।

प्रदर्शन के बाद समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि तालाबों से बेदखली की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर सिंघाड़िया समाज के पारंपरिक अधिकारों और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

समाज के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल रोजगार का नहीं, बल्कि लाखों लोगों के अस्तित्व और सम्मानजनक जीवनयापन का भी सवाल है।

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