रायपुर , सितंबर 15 -- कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हसदेव अरण्य क्षेत्र के तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर केंद्र और राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर निशाना साधते हुए मंगलवार को कहा कि यह जंगल आदिवासियों के जीवन का आधार है और यहां खनन से पर्यावरण तथा वन्यजीवों पर गंभीर असर पड़ेगा।

बघेल ने राजधानी रायपुर के राजीव भवन में पत्रकार वार्ता में आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने 11 दिसंबर 2025 को केंद्रीय कोयला मंत्रालय को पत्र लिखकर तारा कोल ब्लॉक की नीलामी की अनुशंसा की थी, जबकि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने 23 जून 2023 को तारा सहित नौ कोल ब्लॉकों को नीलामी से अलग रखने के लिए केंद्र को पत्र लिखा था।

उन्होंने कहा कि जुलाई 2022 में छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर हसदेव अरण्य में नए कोल ब्लॉक के आवंटन अथवा नीलामी नहीं करने की मांग की थी। कांग्रेस सरकार ने जुलाई 2023 में उच्चतम न्यायालय में हलफनामा देकर क्षेत्र में नई खदान के आवंटन या विकास की आवश्यकता नहीं होने की बात कही थी। इसके बाद अक्टूबर 2023 में केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने तारा सहित कई कोल ब्लॉकों को नीलामी प्रक्रिया से बाहर किया था।

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि तारा कोल ब्लॉक करीब पांच हजार एकड़ क्षेत्र में फैला है, जिसमें चार हजार एकड़ से अधिक घना जंगल है। खनन शुरू होने पर बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई होगी और लेमरू एलीफेंट रिजर्व के आसपास हाथियों के आवागमन तथा अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने दावा किया कि तारा कोल ब्लॉक की नीलामी में यह ब्लॉक सीजी सिन-गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड को मिला है। उन्होंने कंपनी के कॉरपोरेट संबंधों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि राज्य की प्राकृतिक संपदा को निजी हितों के लिए प्रभावित किया जा रहा है।

बघेल ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (पीएससी) की 2024 और 2025 की परीक्षाओं को लेकर भी राज्य सरकार पर सवाल उठाए और पूछा कि कथित गड़बड़ियों की जांच कौन करेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 की मुख्य परीक्षा की उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में विसंगतियां सामने आई हैं। कुछ अभ्यर्थियों को सही और गलत उत्तरों के मूल्यांकन में असंगत अंक दिए जाने के आरोप हैं। उन्होंने मूल्यांकन प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता पर सवाल उठाया।

बघेल ने कहा कि पीएससी की 2025 की परीक्षा में 265 पदों के लिए मुख्य परीक्षा आयोजित की गई। उनके अनुसार 1:3 के अनुपात में 795 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना चाहिए था, लेकिन 608 अभ्यर्थी ही साक्षात्कार के लिए पात्र घोषित हुए। आयोग का कहना है कि शेष अभ्यर्थी न्यूनतम अंक प्राप्त नहीं कर सके। उन्होंने मांग की कि आयोग इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करे और अभ्यर्थियों को उनकी उत्तर-पुस्तिकाएं उपलब्ध कराए।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित