नई दिल्ली , सितंबर 17 -- पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने गुरुवार को कहा कि बाजार पर भरोसा हर मज़बूत अर्थव्यवस्था की अदृष्य नींव है जबकि तस्करी व नकली सामान का कारोबार इस भरोसे को कमज़ोर करते हैं।
पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, "ग्राहक निर्माताओं पर भरोसा करते हैं, निर्माता सप्लाई चेन पर भरोसा करते हैं, और निवेशक अपने संस्थानों व विनियामकों पर भरोसा करते हैं। तस्करी और नकली सामान का कारोबार धीरे-धीरे इस भरोसे को कमज़ोर करते हैं। पूरी आर्थिक व्यवस्था भरोसे पर टिकी है। इसलिए, नकली सामान और तस्करी के ख़िलाफ़ आंदोलन का मकसद उन व्यवस्था और संस्थानों में भरोसे को बचाए रखना है, जिनकी वजह से अर्थव्यवस्था चलती है।" वह यहां उद्योगमंडल फिक्की की तस्करी और नकली सामान के व्यापार के ख़िलाफ़ अभियान चलाने के लिए गठित समिति फिक्की कैस्केड के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में, अवैध व्यापार ने हमें आपूर्ति श्रृंखलाओं की कमजोरियों की सीख दी है। उन्होंने कहा , " हमें भारत को पुन: 'विश्वगुरु' बनाने के सपने , भारत को उद्यम, विनिर्माण और नवाचार का वैश्विक गढ़ बनाने और भारतीय नागरिकों को समझदार, अधिकारों के प्रति जागरूक और सशक्त उपभोक्ता बनाने- इन तीन विचारों की मिल कर रक्षा करना चाहिए और इन पर काम करना चाहिए ।' उन्होंने कहा, " गैर-कानूनी व्यापार इन तीनों ही बातों को कमज़ोर करता है।"कार्यक्रम में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमाशुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के अध्यक्ष विवेक चतुर्वेदी ने कहा कि तस्करी का मतलब अब सिर्फ़ बाहर से प्रतिबंधित सामान लाना ही नहीं रह गया है, बल्कि ऐसी अवैध गतिविधियों को छिपाने के लिए वैध लॉजिस्टिक्स , बुनियादी सुविधाओं , कागजी तैयारी , धन के स्रोत व्यवस्था और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके एक पूरी समानांतर आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण किया जाने लगा है।
फिक्की कैस्केड के चेयरमैन अनिल राजपूत ने कहा, "अवैध व्यापार के खिलाफ लड़ाई सिर्फ़ आर्थिक ज़रूरत नहीं है, और न ही इसे सिर्फ़ राजस्व के नुकसान के नज़रिए से देखा जाना चाहिए।" फिक्की के महासचिव अनंत स्वरूप ने कहा कि अवैध व्यापार के नेटवर्क तेज़ी से ज़्यादा आधुनिक, टेक्नोलॉजी-आधारित और सीमाओं से परे फैल रहे हैं।
फिक्की कैस्केड के सदस्य और अमेजन इंडिया के मुख्य वित्त अधिकारी कपिल हाथी ने कहा कि नकली सामान बनाने वालों की चालाकी और तकनीक बहुत तेज़ी से बढ़ी है, और उनसे आगे रहने का एकमात्र तरीका ऐसी उन्नत प्रौद्योगिकी और तौर तरीके में निवेश करना है जो उन चीज़ों का पता लगा सकें जिन्हें इंसानी आँखें नहीं देख सकतीं।
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