नयी दिल्ली , सितंबर 25 -- उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को गोवा सरकार को नोटिस जारी किया। यह नोटिस 'तहलका' के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल की याचिका पर जारी किया गया है जिसमें उन्होंने बॉम्बे उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी है जिसके तहत उन्हें 2013 में एक सहकर्मी के साथ दुष्कर्म मामले में 10 साल की जेल की सज़ा सुनाई गई थी।
न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। तेजपाल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि उच्च न्यायालय ने उन्हें बरी किए जाने के फैसले को पलट दिया है। श्री सिब्बल ने कहा, "यह फैसला पलटे जाने का मामला है; इसमें अपील का अधिकार है; मैंने आत्मसमर्पण कर दिया है।"शीर्ष अदालत ने गोवा को नोटिस जारी करने पर सहमत होने के बाद, श्री सिब्बल ने तेजपाल की सज़ा पर रोक लगाने की याचिका पर सुनवाई के लिए एक निश्चित तारीख की मांग की। खंडपीठ ने कहा कि वह इस अनुरोध पर विचार करेगी।
गोवा सरकार ने भी उच्चतम न्यायालय का रुख किया है और तेजपाल की सज़ा को बढ़ाकर आजीवन कारावास करने की मांग की है।
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