नयी दिल्ली/चेन्न्ई , मार्च 14 -- प्रसिद्ध तमिल साहित्यकार आर. वैरामुथु को तमिल साहित्य में उल्लेखनीय योगदान, रचनात्मकता और विशिष्ट काव्यात्मक अभिव्यक्ति के लिए वर्ष 2025 का प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया जायेगा।
ज्ञानपीठ ने एक विज्ञप्ति में यह जानकारी देते हुए बताया कि यह निर्णय प्रो. प्रतिभा राय की अध्यक्षता वाली चयन समिति द्वारा लिया गया। समिति ने कहा है कि तमिल भाषा का दायरा बड़ा होने के बावजूद अब तक इसके केवल दो लेखकों पी.वी. अखिलंदम (1975) और डी. जयकान्तन (2002) को यह सम्मान मिला था। श्री आर. वैरामुथु को 60वां ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया जा रहा है जो उस लंबे अंतराल को भरने का काम करेगा ।
श्री वैरामुथु ने पुरस्कार मिलने पर हर्ष व्यक्त करते हुए संवाददाताओं से यहां (चेन्नई) में कहा, "साहित्य जगत में ज्ञानपीठ महानतम से भी श्रेष्ठ है; और तमिल भाषा के संदर्भ में, यह दुर्लभतम से भी अधिक दुर्लभ है।" उन्होंने कहा, "मैं ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त कर भाव-विभोर हूँ, जिसे अक्षर-लोक भारतीय साहित्य का 'नोबेल पुरस्कार' मानता है।"श्री वैरामुथु ने कहा, "अब तक तमिल को प्राप्त दोनों पुरस्कार गद्य लेखकों को प्रदान किए गए थे। यह पहली बार है जब तमिल कविता को ज्ञानपीठ से विभूषित किया गया है। तमिल कविता को कभी ज्ञानपीठ न मिलने की जो दीर्घकालिक टिप्पणी चली आ रही थी, वह मेरे साथ समाप्त होती है। मैं उस तमिल समाज को कृतज्ञता के साथ स्मरण करता हूँ जिसने मुझे पाला-पोसा और आगे बढ़ाया।" उन्होंने कहा, "मैं यह पुरस्कार अपनी मिट्टी और जनता को समर्पित करता हूँ। इस सम्मान ने मेरी आयु को नव-यौवन का अनुभव करा दिया है। यहाँ से आगे मेरी यात्रा एक नई ऊर्जा और ताज़गी भरी छलांग के साथ जारी रहेगी।"श्री आर. वैरामुथु का जन्म 13 जुलाई 1953, तमिलनाडु में हुआ था। उन्होंने 37 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें कविता, गीत और गद्य शामिल हैं । उनकी प्रमुख कृतियां कल्लिकाडू इथिहासम, करुवाची काव्यम, तन्नी देसम, और मोंद्रम उलागा पोर हैं। उन्हें सात बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ गीतकार), पद्म भूषण (2014), पद्म श्री (2003) और साहित्य अकादमी पुरस्कार (2003) से सम्मानित किया जा चुका है । उन्होंने सिनेमा के लिए आठ हजार गीत लिखे हैं।
ज्ञानपीठ पुरस्कार के तहत विजेता को 11 लाख रुपये की राशि, वाग्देवी (सरस्वती) की कांस्य प्रतिमा और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाता है ।
उल्लेखनीय है कि 59वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार (वर्ष 2024 के लिए) संयुक्त रूप से जगतगुरु रामभद्राचार्य और गुलज़ार को देने की घोषणा हुयी थी।
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