नयी दिल्ली , जून 23 -- तमिलनाडु सरकार ने मदुरै जिले में थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर एक दरगाह के पास पत्थर के खंभे के ऊपर 'कार्तिगई दीपम' जलाने की अनुमति देने वाले मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रूख किया है।

राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय की मदुरै खंडपीठ के छह जनवरी के फैसले को चुनौती देते हुए एक 'स्पेशल लीव पिटिशन' (एसएलपी) दायर की है। इस फैसले में पिछले साल दिसंबर में एकल न्यायाधीश के उस आदेश को बरकरार रखा गया था जिसमें उस जगह पर दीप प्रज्वलन करने की अनुमति दी गयी थी।

तमिलनाडु सरकार ने 11 जून को उच्चतम न्यायालय का रुख किया और मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी जिसमें थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर एक दरगाह के पास मौजूद पत्थर के दीप-स्तंभ 'दीपा थून' पर 'कार्तिगई दीपम' जलाने की अनुमति दी गयी थी।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब भक्तों ने इस परंपरा को जारी रखने की अनुमति मांगी जबकि राज्य के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग ने इसका विरोध करते हुए कहा कि उस जगह पर दीपक जलाने की कोई स्थापित परंपरा नहीं है।

उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश ने श्रद्धालुओं की याचिका को मंज़ूरी देते हुए कहा कि इस प्रथा से दरगाह के अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ता और इसे रोकने से श्रद्धालुओं के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन होगा। बाद में, अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सीआईएसएफ की सुरक्षा में दीया जलाने की व्यवस्था करें।

बाद में एक खंडपीठ ने इन आदेशों को बरकरार रखा। खंडपीठ ने यह भी कहा कि इस रस्म से कानून-व्यवस्था की कोई समस्या नहीं होगी और राज्य के उस दावे को खारिज कर दिया कि 'दीपा थून' महज़ ब्रिटिश-कालीन सर्वे का पत्थर था।

राज्य सरकार ने अब शीर्ष अदालत में इन फैसलों को चुनौती दी है।

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