चेन्नई , अगस्त 28 -- तमिलनाडु में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन तथा अन्नाद्रमुक महासचिव ईके. पलानीस्वामी ने शुक्रवार को तमिलनाडु विधानसभा में ज़रूरी चीज़ों की कीमतों में तेज़ी से हुई बढ़ोतरी पर चिंता जतायी और सरकार से गरीबों और मध्यम वर्ग पर बोझ कम करने के लिए तुरंत कदम उठाने की अपील की।

अलग-अलग पार्टियों के सदस्यों की ओर से लाये गये ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर बोलते हुए श्री उदयनिधि ने कहा कि पिछले छह महीनों में चावल, दाल, तेल, चीनी और अन्य ज़रूरी चीज़ों की कीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं। मई में चावल की कीमत 55 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 75 रुपये, प्याज की कीमत 40 रुपये से बढ़कर 80 रुपये, अरहर दाल की कीमत 150 रुपये से बढ़कर 180 रुपये और चीनी की कीमत 40 रुपये से बढ़कर 80 रुपये हो गयी है।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि महंगाई पर काबू पाने के लिए तुरंत रणनीति बनाने के उद्देश्य से वित्त, खाद्य एवं सहकारिता मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष बैठक बुलायी जाये। साथ ही उन्होंने पिछली द्रमुक सरकार के दौरान सब्सिडी वाली कीमतों पर ज़रूरी सामान उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई विशेष सार्वजनिक वितरण पहलों का भी उल्लेख किया।

इस प्रस्ताव पर बोलते हुए श्री पलानीस्वामी ने कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी से आम लोगों पर बहुत बुरा असर पड़ा है। उन्होंने चावल, चीनी, हल्दी, मिर्च, गुड़, इमली, दाल और खाने के तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का उल्लेख किया। उन्होंने सरकार से अपील की कि जिन इलाकों में ये चीज़ें कम कीमत पर मिल रही हैं, वहां से इन्हें खरीदा जाये और हालात को बेहतर बनाने के लिए सहकारी दुकानों के माध्यम से बेचा जाये।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री वेंकटरमनन ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से ज़रूरी चीज़ों की कीमतें भी बढ़ी हैं। उन्होंने बताया कि सरकार मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली एक समिति के माध्यम से रोज़ाना 41 ज़रूरी चीज़ों की कीमतों पर नज़र रख रही है। इसके साथ ही सरकार चावल, प्याज़, आलू और दूसरी ज़रूरी चीज़ों की कीमतों पर बारीकी से नज़र रख रही है और जहां भी ज़रूरत होगी, दखल देगी ताकि उपभोक्ताओं पर इसका असर न पड़े।

उन्होंने कहा कि कीमतें कम करने के लिए राशन की दुकानों और आंगनवाड़ी ग्रीन स्टोर्स के ज़रिए वैसे ही उपाय लागू किये जायेंगे जैसे पिछली सरकारों ने अपनाये थे। उन्होंने जोर दिया कि बढ़ती कीमतों का बोझ जनता पर न पड़े इसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

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