बेंगलुरु , मई 22 -- कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को कहा कि राज्य द्वारा प्रस्तावित मेकेदातु बैलेंसिंग जलाशय परियोजना को तमिलनाडु नहीं रोक सकता है क्योंकि राज्य सरकार अनुमोदन के लिए केंद्र को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है।

राज्य में जल संसाधन मंत्रालय भी संभाल रहे श्री शिवकुमार ने कहा कि डीपीआर तैयार कर लिया गया है और महत्वाकांक्षी कावेरी नदी परियोजना के लिए एक समर्पित कार्यालय भी स्थापित किया गया है।

उन्होंने चामराजनगर जिले में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) से अनुमति मिलने के बाद परियोजना के लिए भूमि पूजन किया जाएगा। उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार अंतिम निर्णय सीडब्ल्यूसी द्वारा लिया जाएगा।"उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रस्तावित जलाशय के जलमग्न होने की संभावना वाले वन क्षेत्रों की भरपाई करने हेतु वनीकरण के लिए वैकल्पिक भूमि की पहचान कर रही है।

श्री शिवकुमार ने यह जानकारी देते हुए कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य बेंगलुरु की पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति करना है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक यह सुनिश्चित करेगा कि कावेरी जल में तमिलनाडु के आवंटित हिस्से पर कोई असर न पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि कर्नाटक न्यायाधिकरण के फैसले के अनुसार तमिलनाडु प्रतिवर्ष 177 टीएमसी कावेरी जल छोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि अगर अपर्याप्त बारिश पेयजल आपूर्ति एवं किसानों के हितों को प्रभावित करती है तो सरकार विशेषज्ञों से परामर्श करेगी। अंतरराज्यीय जल विवाद में कर्नाटक के रुख को दोहराते हुए श्री शिवकुमार ने कहा कि शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस मामले का फैसला केंद्रीय जल आयोग द्वारा लेना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि कनकपुरा के समीप कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेदातु परियोजना कई वर्षों से एक विवादास्पद मुद्दा बना हुआ है जिसमें तमिलनाडु ने निचले इलाकों में जल प्रवाह एवं सिंचाई से संबंधित चिंताओं को लेकर जलाशय परियोजना का निरंतर विरोध किया है।

कर्नाटक सरकार ने इससे पहले उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों के बाद डीपीआर में संशोधन किया था, जिसमें वन भूमि के जलमग्न होने से संबंधित विवरण शामिल किए गए थे और यह आश्वासन दिया गया था कि कावेरी जल में तमिलनाडु का हिस्सा अप्रभावित रहेगा।

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