चेन्नई , अगस्त 01 -- तमिलनाडु में शनिवार से घरों को सूचीबद्ध करने और जनगणना का एक महीने तक चलने वाला जमीनी अभियान (फील्ड ऑपरेशन) शुरू हो गया है और यह 30 अगस्त तक चलेगा।

इस अवधि के दौरान लगभग 1.15 लाख प्रगणक, करीब 19,000 पर्यवेक्षकों की निगरानी में, 1,026 प्रशासनिक प्रभारों के अंतर्गत आने वाले 1.20 लाख मकान सूचीकरण खंडों में घर-घर जाकर सभी परिवारों का सर्वेक्षण करेंगे।

अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि 33 सवालों वाले एक तय प्रश्नावली का इस्तेमाल करके, इस प्रक्रिया में घरों की स्थिति, बुनियादी सुविधाओं और ज़रूरी सेवाओं तक पहुँच के बारे में अहम जानकारी जुटाई जाएगी।

व्यापक और सटीक कवरेज सुनिश्चित करने के लिए भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना में आधुनिक तकनीक को पारंपरिक घर-घर सर्वेक्षण के साथ जोड़ा गया है। क्षेत्रीय दौरे के दौरान प्रगणक समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से आंकड़े डिजिटल रूप से दर्ज करेंगे, जिससे आंकड़ों का तेजी से प्रसंस्करण, अधिक सटीकता और जनगणना की प्रक्रिया अधिक सुगम हो सकेगी।

जनगणना अधिनियम, 1948 के अनुसार, इकट्ठा की गई सभी जानकारी कानूनी रूप से सुरक्षित और पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी, और इसका इस्तेमाल सिर्फ़ सांख्यिकीय विश्लेषण और सार्वजनिक नीति बनाने के लिए किया जाएगा। जनगणना डेटा का डिजिटल कलेक्शन और प्रोसेसिंग, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी ) अधिनियम के नियमों के भी अनुरूप है।

जमीनी तौर में काम शुरू होने से पहले, जनगणना 2027 के लिए शुरू की गई 'सेल्फ़-एन्यूमरेशन' (एसई) सुविधा को तमिलनाडु के लोगों से अच्छा प्रति उत्तर मिला है, 17 जुलाई से , 31 जुलाई तक 10 लाख से ज़्यादा परिवारों ने आधिकारिक पोर्टल के ज़रिए अपनी जानकारी ऑनलाइन सफलतापूर्वक जमा की है। जिन लोगों ने सेल्फ़-एन्यूमरेशन पूरा कर लिया है, उनसे अनुरोध है कि वे अपनी सेल्फ़-एन्यूमरेशन आईडी (एसई आईडी) तैयार रखें ताकि घर की सूची बनाने का काम (एचएलओ) पूरा करने के लिए आने वाले जनगणना कर्मचारी के साथ इसे साझा किया जा सके।

आवास गणना (हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस) के फील्ड ऑपरेशन के दौरान सभी परिवारों को शामिल किया जाएगा, जिनमें वे परिवार भी शामिल हैं जिन्होंने 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' (खुद जानकारी भरने) की सुविधा का इस्तेमाल नहीं किया था।

जनगणना के शुरुआती चरण के तौर पर यह डेटा सभी प्रशासनिक स्तरों पर रणनीतिक योजना बनाने, लक्षित कल्याणकारी योजनाओं, सबूतों पर आधारित नीति बनाने और लंबे समय के विकास कार्यों में मदद करने के लिए एक ज़रूरी सांख्यिकीय ढांचा तैयार करता है।

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