चेन्नई , मई 21 -- पिछले सप्ताह बने निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव से तमिलनाडु के दक्षिणी और कावेरी डेल्टा जिलों में अच्छी बारिश होने के कारण कुछ दिनों तक तापमान में कमी आने के बाद अब राज्य के कई हिस्सों में भीषण गर्मी ने फिर से लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया है।
राज्य के 17 जिले प्रचंड गर्मी की चपेट में हैं। चेन्नई में बुधवार को इस मौसम का सर्वाधिक 42 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।
मौसम विभाग ने गुरुवार को जारी अद्यतन में बताया कि चेन्नई के मीनाम्बक्कम वेधशाला में तापमान में तीन से चार डिग्री की वृद्धि दर्ज की गई और पारा 108 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच गया। वहीं नुंगमबक्कम वेधशाला में भी स्थिति कम गंभीर नहीं रही, जहां तापमान 105.6 डिग्री फारेनहाइट दर्ज किया गया, जो इस मौसम में महानगर का सर्वाधिक तापमान है।
आमतौर पर वेल्लोर और तिरुत्तनी जैसे उत्तर आंतरिक जिलों में 'कात्तिरी' गर्मी के मौसम के दौरान और उससे पहले 104 से 106 डिग्री फारेनहाइट तापमान दर्ज होता रहा है, लेकिन इस बार चेन्नई ने उन्हें पीछे छोड़ दिया है।
मौसम विभाग ने कहा कि ऐसी भीषण गर्मी की स्थिति अगले एक सप्ताह तक बनी रह सकती है, हालांकि 'कात्तिरी' मौसम 29 मई को समाप्त होगा।
पिछले दो-तीन दिनों से तेज धूप और उमस के कारण लोग घरों में रहने को मजबूर हो गए हैं। वातानुकूलित उपकरणों के अधिक उपयोग के कारण बिजली खपत में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों को सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। साथ ही निर्जलीकरण से बचने के लिए नियमित रूप से पानी, फलों का रस, नारियल पानी और मठ्ठा जैसे तरल पदार्थ लेने की अपील की है।
इस बीच मौसम विभाग ने बताया कि तमिलनाडु के कुछ स्थानों पर वर्षा दर्ज की गई, जबकि पुड्डुचेरी और कराईकल क्षेत्रों में मौसम शुष्क बना रहा।
पिछले 24 घंटों के दौरान तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में अधिकतम तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गयी, जबकि राज्य के अन्य भागों पुड्डुचेरी और कराईकल में तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।
मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून 26 मई के आसपास केरल में प्रवेश कर सकता है, हालांकि इसमें चार दिन आगे या पीछे होने की संभावना भी है। दक्षिण-पूर्व अरब सागर से मध्य बंगाल की खाड़ी तक बना द्रोणिका क्षेत्र अब मध्य बंगाल की खाड़ी से दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी होते हुए तमिलनाडु तक फैला हुआ है और यह समुद्र तल से 3.1 से 4.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
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