चेन्नई , जुलाई 30 -- तमिलनाडु पुलिस की सीबी-सीआईडी शाखा ने पलानी में एक मंदिर की 1.4 एकड़ जमीन की अवैध बिक्री के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
अन्नाद्रमुक के एक पूर्व विधायक ने इस मामले में मद्रास उच्च न्यायालय का रुख कर इसकी सीबीआई जांच की मांग की है।
पलानी स्थित भगवान धंडायुथापानी मंदिर की 1.4 एकड़ जमीन की अवैध बिक्री के मामले की दो सप्ताह पहले जांच शुरू करने वाली सीबी-सीआईडी ने बुधवार शाम चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया। विल्लुपुरम के डी मुरुगदास (56) ने जमीन बेची थी और तिरुप्पुर के के वेल्लादुरई (60) तथा डी सेतुपति ने जमीन खरीदी थी। पलानी के एस. अनवरदीन (65) ने इस जमीन की बिक्री में मदद की थी। इन चारों को बीएनएस अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है, जिनमें धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश शामिल हैं।
ये गिरफ्तारियां उसी समय हुई जब अन्नाद्रमुक के पलानी से पूर्व विधायक के.एस.एन. वेणुगोपालु सेनापति ने पलानी मंदिर मठ की 100 करोड़ रुपये की जमीन के फर्जी पंजीकरण की सीबीआई जांच का आदेश देने की मांग को लेकर मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै खंडपीठ में जनहित याचिका दायर की।
याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्होंने 2004 से 2006 तक भगवान मुरुगन के छह धामों में से एक-पलानी स्थित धंडायुथापानी स्वामी मंदिर के न्यासी के रूप में कार्य किया था। उन्होंने कहा कि यह मामला पलानी आदिवरम में अत्यंत मूल्यवान अचल संपत्ति के कथित अवैध पंजीकरण, धोखाधड़ी से हस्तांतरण और गबन के प्रयास से संबंधित है।
उन्होंने कहा कि आरोपों में मूल्यवान मंदिर संपत्ति को प्रभावित करने वाले दस्तावेजों का फर्जी निष्पादन और पंजीकरण तथा सरकारी पद के दुरुपयोग, साजिश और सार्वजनिक रिकॉर्ड में हेरफेर सहित गंभीर अपराध शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जांच सीबी-सीआईडी को सौंपी गयी थी, जो तमिलनाडु सरकार के नियंत्रण में है। आरोप पंजीकरण विभाग के अधिकारियों और संभवतः उच्च अधिकारियों तक फैले हुए हैं, इसलिए राज्य के नियंत्रण वाली एजेंसी द्वारा की जाने वाली जांच से जनता में विश्वास पैदा नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि केवल सीबीआई जांच ही स्वतंत्रता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करेगी। इसके साथ ही उन्होंने जांच की निगरानी के लिए उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को नियुक्त करने की भी प्रार्थना की।
न्यायमूर्ति सी.वी. कार्तिकेयन और न्यायमूर्ति आर. शक्तिवेल की पीठ ने इस मामले की सुनवाई 30 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।
सीबीआई जांच की मांग करने वाली एक अन्य याचिका पलानी नगर पालिका की अध्यक्ष आर. उमा माहेश्वरी प्रदीप ने भी दायर की थी।
पलानी में धंडायुथापानी स्वामी मठ की 100 करोड़ रुपये मूल्य की 1.4 एकड़ जमीन को धोखाधड़ी से दो निजी व्यक्तियों के नाम पर पंजीकृत कर दिया गया है। हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के अधिकारियों ने पंजीकरण रद्द करने के लिए पंजीकरण विभाग को पत्र लिखा है और जांच के आदेश दिये हैं। सूत्रों के अनुसार मठ की इस जमीन का उपयोग वर्तमान में मंदिर दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग स्थल के रूप में किया जाता है।
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