चेन्नई , मई 18 -- तमिलनाडु में असंतुष्ट विधायकों की बगावत से जूझ रही अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) को सोमवार को उस समय एक और झटका लगा जब वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री एस. सेम्मलाई ने पार्टी छोड़ दी।

मेट्टूर से चार बार विधायक रहे श्री सेम्मलाई ने पार्टी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए "भारी मन" से अपने इस्तीफे की घोषणा की और नेतृत्व से संगठन को फिर से खड़ा करने के लिए एकजुट होकर काम करने का आग्रह किया। किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होने की संभावना को साफ तौर पर खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि अभी तक ऐसा कोई विचार उनके मन में नहीं आया है और उनका भविष्य समय ही तय करेगा।

पार्टी महासचिव ईके पलानीस्वामी को अपना इस्तीफा भेजने के बाद अपने गृह जिले सलेम में संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी के सभी पदों और अन्ना द्रमुक की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है, क्योंकि वह बार-बार मिल रही चुनावी असफलताओं और पार्टी आलाकमान द्वारा इस गिरावट को रोकने में नाकाम रहने की बात को पचा नहीं पा रहे थे। अन्नाद्रमुक के नेतृत्व, शीर्ष और वरिष्ठ नेताओं तथा जिला और मुख्यालय सचिवों से अपने अहंकार को त्यागकर पार्टी की रक्षा करने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि अन्नाद्रमुक तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण शक्ति बनी हुई है और राज्य तथा उसके लोगों को इस पार्टी की आवश्यकता है, चाहे वह सत्ता में हो या विपक्ष में। उन्होंने कहा, "लोग जानते हैं कि तमिलनाडु के विकास और सुरक्षा के लिए अन्नाद्रमुक की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।"श्री सेम्मलाई ने कहा कि उन्होंने अन्नाद्रमुक के संस्थापक एवं पूर्व मुख्यमंत्री एमजीआर के साथ और बाद में पार्टी प्रमुख जे. जयललिता के साथ काम किया है, इसलिए उन्होंने पार्टी से अलग होने से पहले "इन दो महान नेताओं की आत्माओं" से क्षमा मांगना अपना कर्तव्य समझा।

राज्य के मुख्यमंत्री एवं तमिझगा वेत्री कज़गम (टीवीके) प्रमुख विजय द्वारा सदन में अपना बहुमत साबित करने के लिए लाए गए विश्वास मत के समर्थन में 25 बागी विधायकों के वोट देने के बाद पार्टी के भीतर चल रही बगावत का ज़िक्र करते हुए, 2001 की जयललिता कैबिनेट में स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री रह चुके पूर्व मंत्री ने श्री पलानीस्वामी के नेतृत्व वाले समूह और पूर्व मंत्रियों एवं अन्ना द्रमुक के कद्दावर नेताओं सी. वी. शानमुगम और एस.पी. वेलुमनी के नेतृत्व वाले दूसरे समूह से अपील की कि वे "अपने अहंकार को भूल जाएं", अपनी कमियों को सुधारें और पार्टी की रक्षा तथा उसे मज़बूत करने के लिए मिलकर प्रयास करें। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि एमजीआर द्वारा एक "जन आंदोलन" के रूप में स्थापित यह पार्टी धीरे-धीरे लोगों से दूर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता अब अनाथ बच्चों की तरह कष्ट भोग रहे हैं।

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