चेन्नई , अगस्त 19 -- तमिलनाडु में सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) के अधिकारियों ने बुधवार को पिछली द्रमुक सरकार के दौरान बिजली बोर्ड द्वारा एल्युमीनियम कंडक्टरों की खरीद में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में राज्य के 51 स्थानों पर तलाशी ली।

यह तलाशी एल्युमीनियम कंडक्टर खरीद की कई निविदाओं में संदिग्ध वित्तीय कदाचार, नियमों के उल्लंघन और हेरफेर के मामलों की जांच का हिस्सा है। वर्ष 2021 से 2023 के बीच बिजली मंत्री रहे द्रमुक के पूर्व मंत्री वी. सेंथिलबालाजी के करीबी सहयोगियों से जुड़े ठिकानों पर भी तलाशी जारी है। अधिकारियों ने तलाशी के दायरे में आये स्थानों पर खरीद प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्डों की जांच की।

पिछली द्रमुक सरकार के दौरान कंडक्टर खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के तमिलनाडु सरकार के आरोपों के मद्देनजर यह तलाशी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ऊर्जा मंत्री आर. निर्मलकुमार ने 25 जून को टीएनईबी विभाग पर श्वेत पत्र जारी करते हुए पिछली सरकार के दौरान जारी किये गये नौ कंडक्टर खरीद टेंडरों में लगभग 1,028 करोड़ रुपये की अनियमितताओं को रेखांकित किया था। मंत्री ने कहा था कि सरकार कथित अनियमितताओं की जांच कर रही है और जांच के नतीजों के आधार पर उचित कार्रवाई की जायेगी।

एजेंसी द्वारा टेंडर दस्तावेजों, खरीद रिकॉर्डों, कोटेशन, भुगतानों और अन्य संबंधित लेन-देन की सूक्ष्मता से जांच करने की उम्मीद है ताकि यह स्थापित किया जा सके कि क्या नियमों का उल्लंघन या वित्तीय कदाचार हुआ था। छापों के दौरान एकत्र किये गये साक्ष्यों के आधार पर अधिकारियों द्वारा खरीद प्रक्रिया से जुड़े व्यक्तियों से पूछताछ करने की संभावना है।

उल्लेखनीय है कि सेंथिलबालाजी के कार्यकाल के दौरान 397 करोड़ रुपये के ट्रांसफार्मर खरीद घोटाले के संबंध में सीबीआई की जांच पहले से ही जारी थी।

वर्ष 2021 से 2034 तक टैनगेडको द्वारा 1,182.88 करोड़ रुपये मूल्य के 45,800 वितरण ट्रांसफार्मरों की खरीद की जांच में डीवीएसी द्वारा कथित देरी के बाद मद्रास उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच का आदेश दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने या हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए सीबीआई जांच को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था तथा जांच को आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी।

इसके बाद सीबीआई ने टैनगेडको के पूर्व अधिकारियों और निजी ठेकेदारों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के तहत औपचारिक रूप से प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की।

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