चेन्नई , मई 15 -- तमिलनाडु में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (अन्ना द्रमुक) के बागी विधायकों ने शुक्रवार को पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) से अपील की कि वे मतभेदों को सुलझाने के लिए उन्हें बातचीत के लिए बुलाएं।
राज्य के मुख्यमंत्री एवं तमिलागा वेट्ट्री कज़गम (टीवीके) अध्यक्ष सी. जोसेफ विजय के विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोट देने, पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने के आरोप में दलबदल विरोधी कानून के तहत सदन की सदस्यता खोने की आशंका से घबराये इन विधायकों ने कहा कि श्री पलानीस्वामी उन्हें बुलाएं और बातचीत करें।
गौरतलब है कि अन्ना द्रमुक के कुल 47 विधायकों में से 25 बागियों ने सरकार के पक्ष में वोट दिया, जबकि 22 विधायकों ने विश्वास मत के विरोध में मतदान किया। इस विश्वास मत में विजय ने 144 वोटों के समर्थन के साथ काफी आसानी से जीत हासिल की। विरोध में 22 वोट पड़े और पांच सदस्य मतदान के दौरान गैरहाजिर रहे। मतदान के समय सदन में कुल 171 सदस्य मौजूद थे (मुख्य विपक्षी दल द्रमुक के 59 सदस्य और उसके सहयोगी डीएमडीके का एक सदस्य सदन से बाहर चले गए थे), जिससे सदन की कुल संख्या 231 से घटकर कम हो गयी और सरकार के लिए जीत आसान हो गयी।
सदन में कुल 234 सदस्य हैं। इनमें से एक सीट विजय द्वारा दो सीटों पर जीत हासिल करने के बाद खाली कर दी गई थी। टीवीके के एक विधायक को उच्च न्यायालय ने विश्वास मत में शामिल होने से रोक दिया था, और एक सदस्य स्वयं अध्यक्ष थे (जो केवल टाई होने की स्थिति में ही वोट डाल सकते हैं), जिससे सदन की प्रभावी संख्या 231 रह गयी थी। श्री पलानीस्वामी द्वारा कल शाम विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर को दी गयी उस याचिका के बाद आया है, जिसमें उन्होंने विश्वास मत के दौरान पार्टी के आदेश का उल्लंघन करने के लिए इन बागियों को अयोग्य घोषित करने की मांग की थी। राज्यपाल के कार्यालय में भी एक अन्य याचिका प्रस्तुत की गयी थी।
इसके अलावा विद्रोहियों के खेमे से लोग अलग होने लगे है और पूर्व मंत्री केसी वीरमणि श्री पलानीस्वामी के खेमे में शामिल हो गए। विद्रोही समूह का नेतृत्व कर रहे और विधायक दल के नेता चुने गये पूर्व मंत्री एस.पी. वेलुमणि ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "हमें हमेशा की तरह दूर भगाने की बजाय एक बार बुलाइए। सब कुछ बेहतर हो जाएगा। यह पार्टी के लिए अच्छा होगा।"हालाँकि, उन्होंने विजय सरकार को समर्थन देने का बचाव इस आधार पर किया कि जनादेश तो टीवीके को ही मिला था। अन्ना द्रमुक के लिए श्री पलानीस्वामी द्वारा किए गए ज़ोरदार चुनाव प्रचार को स्वीकार करते हुए,श्री वेलुमणि ने इस बात पर अफ़सोस जताया कि चुनाव में बुरी हार के बावजूद पार्टी में उचित सलाह-मशविरा नहीं किया गया और श्री पलानीस्वामी ने एकतरफ़ा फ़ैसले लिये।
असंतुष्टों ने विधानसभा अध्यक्ष और राज्यपाल के दफ़्तर में याचिकाएँ भी सौंपी हैं, जिसमें उन्होंने अपनी वैधता का दावा किया है। इसके अलावा, उन्होंने श्री पलानीस्वामी और 21 अन्य विधायकों को दलबदल विरोधी क़ानून के तहत अयोग्य घोषित करने की भी माँग की है, क्योंकि विधानसभा में विद्रोही समूह के पास ही ज़्यादातर विधायक हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित