चेन्नई , मई 27 -- तमिलनाडु में राजनीतिक उथल-पुथल से जूझ रही विपक्षी पार्टी अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) में लगभग दो हफ़्ते से चल रही अंदरूनी कलह अब थमता नजर आ रहा है।

पार्टी में यह कलह तब शुरू हुआ था जब 25 सदस्यों वाले बागी गुट ने राज्य विधानसभा में मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कज़गम (टीवीके) के संस्थापक सी. जोसेफ विजय के विश्वास मत का समर्थन किया था, जिसके बाद पार्टी में दल-बल और इस्तीफों का दौर शुरू हो गया था।

अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व वाले खेमे के सदस्य एवं पूर्व मंत्री के. सी. वीरमणि ने पत्रकारों से कहा, "सब कुछ खत्म हो गया है। हम सब एक हो गए हैं।" इसके बाद वे सुलह समझौते को अंतिम रूप देने के लिए पूर्व मंत्री सी. वे. षणमुगम और एस. पी. वेलुमणि के नेतृत्व वाले बागी गुट के सदस्यों से मिलने चले गये। इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए अन्नाद्रमुक के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) इकाई ने सोशल मीडिया पर एक कड़ा संदेश साझा किया। इसमें दिवंगत नेता जे. जयललिता के इस कथन का ज़िक्र किया गया, "भले ही कई सदियां बीत जाएं अन्नाद्रमुक हमेशा लोगों के लिए काम करती रहेगी।" संदेश में कहा गया, "अब हमारे बीच कोई फूट नहीं है। कोई भी इस मज़बूत किले को हिला नहीं सकता। हमारा लक्ष्य केवल एक है... 'दो पत्तियां' (अन्नाद्रमुक का चुनाव चिह्न) वाला झंडा फोर्ट सेंट जॉर्ज (सत्ता का केंद्र) पर लहराना चाहिए।" इसमें कहा गया, "कल हमारा है! तमिलनाडु भी हमारा है!"इस संदेश में कहा गया है कि पार्टी लाखों कार्यकर्ताओं के बलिदान पर बनी एक मज़बूत और अडिग शक्ति बनी हुई है और यह घोषणा की गयी कि अब पार्टी में कोई आंतरिक फूट नहीं होगी। इस कदम से पूरे राज्य में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को बड़ी राहत मिली है। चुनाव के बाद के राजनीतिक घटनाक्रम में, जब अन्नाद्रमुक ने विधानसभा चुनावों में 47 सीटें जीती थीं। श्री पलानीस्वामी के नेतृत्व वाला एक गुट 22 विधायकों के साथ अलग से काम कर रहा था, जबकि 25 विधायकों के समर्थन पर निर्भर बागी गुट स्वतंत्र रूप से काम कर रहा था, जिसके चलते पार्टी में विभाजन हो गया था।

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