चेन्नई , मई 13 -- तमिलनाडु में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (अन्ना द्रमुक) महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने पार्टी के 25 बागी विधायकों को उनके पदों से हटा दिया, जिसमें उनके पास मौजूद जिला सचिवों के पद भी शामिल है।

इन विधायकों ने राज्य के मुख्यमंत्री एवं तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) अध्यक्ष विजय की ओर से लाये गये विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया था। इससे पार्टी में विभाजन औपचारिक रूप से तय हो गया। विशेष बात यह है कि तमिलनाडु विधानसभा में पहली बार 'क्रॉस वोटिंग' (पार्टी लाइन के खिलाफ वोटिंग) देखने को मिली। दलबदल की घटनाएं यहाँ बहुत कम होती हैं, इसलिए पार्टी के प्रति वफादारी बहुत मजबूत रहती है। जन-आकर्षण वाले दिग्गज नेताओं के नेतृत्व वाली दोनों द्रविड़ पार्टियों ने अपने सदस्यों को एक तरह से 'बंधक' बनाकर रखा था, जो शायद ही कभी अपनी-अपनी पार्टियों के खिलाफ वोट करने की हिम्मत जुटा पाते थे।

राज्य में अन्ना द्रमुक ने 47 सीटें जीती हैं। इनमें से 25 विधायक बागी हो गये हैं। इन विधायकों ने श्री पलानीस्वामी के 'विधानमंडल दल के नेता' होने के दावे और पूर्व मंत्री अग्री एसएस कृष्णमूर्ति को 'पार्टी व्हिप' नियुक्त करने के फैसले को चुनौती दी थी।

'पार्टी व्हिप' की अवहेलना करते हुए, पूर्व मंत्रियों सी.वी. षणमुगम, एस.पी. वेलुमणि और सी. विजयभास्कर के नेतृत्व वाले बागी समूह ने पार्टी में विभाजन को औपचारिक रूप दे दिया है। विशेष बात यह है कि अन्ना द्रमुक की विधायक लीमा रोज़ 'लॉटरी किंग' सैंटियागो मार्टिन की पत्नी और तमिलनाडु के मंत्री एवं सत्ताधारी टीवीके के चुनाव अभियान प्रबंधन महासचिव आधव अर्जुन की सास हैं। वह भी बागियों के खेमे में शामिल हो गयी हैं।

शुरुआत से ही वह टीवीके के साथ गठबंधन करने की दिशा में काम कर रही थीं। चूंकि बागियों ने विधानसभा अध्यक्ष को एक अलग पत्र सौंपकर श्री वेलुमणि को विधायक दल का नेता और श्री सी. विजयभास्कर को सचेतक चुने जाने की जानकारी दी है, इसलिए उन्होंने सचेतक के तौर पर श्री कृष्णमूर्ति के अधिकार पर सवाल उठाया है और सरकार के खिलाफ वोट देने के उनके निर्देश की अवहेलना की है।

विश्वास मत के बाद मीडिया से बात करते हुए श्री षणमुगम ने कहा, "यह अध्यक्ष ही तय कर सकते हैं कि बहुमत किसके पास है और विधायक दल का नेता कौन है।" उन्होंने श्री पलानीस्वामी पर राज्यपाल को एक जाली पत्र सौंपने का भी आरोप लगाया, जिसमें उन्होंने विधायकों के बहुमत का समर्थन होने का दावा किया था। विधानसभा में श्री पलानीस्वामी ने टीवीके पर अन्ना द्रमुक के कुछ सदस्यों को मंत्री पद का लालच देकर अपने पाले में करने का आरोप लगाया और पार्टी के साथ विश्वासघात करने के लिए बागियों की कड़ी आलोचना की।

श्री पलानीस्वामी ने कहा, "वे अन्ना द्रमुक के 'दो पत्ती' चुनाव चिह्न पर चुनकर आए थे। पार्टी के प्रति वफादार रहने के बजाय, उन्होंने मंत्री बनने के लालच में पार्टी के साथ विश्वासघात किया है। यह न केवल कानून और न्याय के खिलाफ है, बल्कि तमिलनाडु के इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना है।"श्री षणमुगम के अनुसार, इस फूट की शुरुआत ईपीएस की उन चालों से हुई थी जिनके ज़रिए वे द्रमुक के समर्थन से मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, और जिसके लिए उन्होंने बातचीत भी की थी। हालाँकि, ईपीएस खेमे के ओएस मानियन ने इस बात से इनकार किया है।

अन्ना द्रमुक को 2019 के बाद से लगातार हुए चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है। बागी नेता इस बात से काफ़ी उत्साहित हैं कि मुख्यमंत्री विजय ने अहम विश्वास मत से पहले उनसे मुलाक़ात की और उन्हें इन शब्दों के साथ भरोसा दिलाया, "मैं हूँ ना। मैं सब संभाल लूँगा।"श्री पलानीस्वामी के गुस्से का शिकार होने वालों में वरिष्ठ नेता और कई पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद और पूर्व विधायक शामिल हैं। इनमें पूर्व मंत्री नथम आर विश्वनाथन, एसपी वेलुमणि, सी वीई षणमुगम, आर कामराज, डॉ. सी विजयभास्कर, पी थंगामणि, केपी अनबलगन, पी बेंजामिन, उदुमलाई के राधाकृष्णन, एमसी संपत, केसी वीरमणि, एमआर विजयभास्कर, पी बालकृष्ण रेड्डी शामिल है।

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