चेन्नई , अगस्त 06 -- तमिलनाडु में 'तमिलगा वेट्री कझगम' (टीवीके) सरकार ने अपने पहले कृषि बजट में किसानों के कल्याण और सिंचाई को बढ़ावा देने पर जोर दिया है।

राज्य के कृषि मंत्री आर. विनोद ने गुरुवार को राज्य विधानसभा में खेती-किसानी के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसे ध्यान में रखते हुए 2026-27 के बजट में कई नयी और अहम योजनाएं शामिल की गई हैं। इन योजनाओं का मकसद किसानों की जरूरतों को यथासंभव पूरा करना, कृषि में वैज्ञानिक प्रगति के साथ तालमेल बिठाना और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाकर उनकी समृद्धि सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि यह बजट किसानों और निर्यातकों के साथ बातचीत के बाद और नेतृत्व के दीर्घकालिक कृषि विजन के अनुरूप तैयार किया गया है।

बजट में टिकाऊपन पर बहुत जोर दिया गया है। मिट्टी की उर्वरता की रक्षा के लिए 'तमिलनाडु मृदा संरक्षण मिशन' के तहत 122.51 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। सरकार ने धान के बीज उत्पादन और सब्सिडी के लिए भी 34.72 करोड़ रुपये रखे हैं। 'तमिलनाडु मिलेट मिशन' (63.81 करोड़ रुपये) और 'माइनर मिलेट्स मिशन' (7.61 करोड़ रुपये) के जरिए पारंपरिक फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही क्विनोआ और बकव्हीट जैसी अधिक पोषण वाली फसलों के लिए पायलट परियोजना भी शुरू किए जा रहे हैं।

सरकार ने उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए दालों और तिलहन के लिए 'आत्मनिर्भरता मिशन' के तहत 203.64 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। मंत्री ने बताया कि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार करने के उद्देश्य से कपास की खेती को पुनर्जीवित करने, मक्का उत्पादन और कृषि-वानिकी के लिए अतिरिक्त धन रखा गया है।

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